बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

सपनों को दिखा दो सूरज


स्वप्न 
सदियों से
तुम्हारी आँखों में
जो पल रहे हैं
इतिहास होने से पहले
उन्हें एक बार
सूरज दिखा दो

सपनो का 
होता है अपना भूगोल
अपनी दिशाएं 
अपने मौसम 
जो निर्भर होते हैं
मन के भीतर बहने वाली 
हवाओं पर

धूप में बिछा दो 
मन की चटाई
और उलट पुलट लो
सोते सपनो को
सील गए हैं
दबे दबे 
ह्रदय की  दीवारों के
किसी कोने में

लगने दो वसंती हवा
कि खिल उठेंगे
उनके मुरझाये रंग
और बोल पड़ेंगे
सोये हुए ज़ज्बात
थोड़ी साँसे मिल जाएँगी
सपनों को भी

दे दो
कुछ पंख चुनकर
जो छोड़े थे कबूतरों ने
सपनों को
भरने को उड़ान
उन्मुक्त आकाश में
करने दो
सफ़ेद सेमल के फाहों से तैरते
बादलों से मन की बातें

देर तक
रखने से बंद
अँधेरे कोठरी में 
या फिर प्राचीर के विस्तार में भी 
घुट सकता है दम
फिर ये तो सपने हैं
नाजुक से गौरैया के
नए पंख वाले बच्चों की तरह
छोड़ दो उन्हें स्वछन्द 
एक बार के लिए 

आँखों के 
सपनों को 
दिखा दो सूरज 

20 टिप्‍पणियां:

  1. स्वप्न
    सदियों से
    तुम्हारी आँखों में
    जो पल रहे हैं
    इतिहास होने से पहले
    उन्हें एक बार
    सूरज दिखा दो
    ....

    देर तक
    रखने से बंद
    अँधेरे कोठरी में
    या फिर प्राचीर के विस्तार में भी
    घुट सकता है दम
    फिर ये तो सपने हैं
    नाजुक से गौरैया के
    नए पंख वाले बच्चों की तरह
    छोड़ दो उन्हें स्वछन्द
    एक बार के लिए
    sahi kaha , dil ne ise akshrashah sweekar kiya

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  2. अरूण जी,

    आपने दबे सीलन भरे सपनों को धूप दिखाने की प्रेरणा दी।
    आभार इस सार्थक रचना के लिये।

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  3. आज तो एक शेरः
    ख़्वाब तो काँच सए भी नाज़ुक हैं,
    टूटने से इन्हें बचाना है!

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  4. धूप में बिछा दो
    मन की चटाई
    और उलट पुलट लो
    सोते सपनो को
    सील गए हैं
    दबे दबे
    ह्रदय की दीवारों के
    किसी कोने में
    बहुत सुन्दर....आभार इस सार्थक रचना के लिये।

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  5. सपनों को सूरज दिखा दो , ह्रदय की दीवारों के किसी कोने में दबे हुए सील गए ...
    सपने पूरा करने को प्रोत्साहन देती रचना !

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  6. सपनों को हकीकत में बदलना भी शायद कई बार भाता नहीं.

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  7. आपकी रचना बेह्द सुन्दर और सकारात्मक सोच को दर्शाती है ……………भावो को खूबसूरती से पिरोया है मगर मैने एक कमेंट अभी लिखा था कि वो जैसे ही पोस्ट करने लगी कि डिलीट हो गया अब वैसा तो नही बन रहा तो इसी से काम चलाइये अब्।

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  8. सपनों को सूरज दिखाने की बात अपने आप में महत्वपूर्ण है. आज लोग सपने तो बहुत देखते हैं पर उनको हकीकत में बदलने का साहस नहीं दिखा पाते. ऐसे लोगों को यह रचना प्रेरणा प्रदान करेगी. बधाई स्वीकारें . साभार-अवनीश सिंह चौहान

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  9. छोड़ दो उन्हें स्वछन्द
    एक बार के लिए


    जी उन्हें छोड़ना वाजिब लग रहा है ...अन्यथा जीवनं में आनद और सकूँ ......और सपनो को सूरज ...दोनों अलग अलग हो जायेंगे ....पूरी कविता एक बिम्ब के इर्द गिर्द सार्थक अर्थ की सृष्टि करती है ...आपका आभार अरुण जी इस सार्थक कविता के लिए

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  10. घुट सकता है दम
    फिर ये तो सपने हैं
    नाजुक से गौरैया के
    नए पंख वाले बच्चों की तरह
    छोड़ दो उन्हें स्वछन्द
    एक बार के लिए

    घुट जाता है दम, कितने ही सपनो का...कुछ इस तरह कि उनका अस्तित्व भी नहीं बचता...बहुत जरूरी है...समय-समय पर धूप और हवा..इन सपनो के सांस लेने के लिए
    मर्मस्पर्शी कविता

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  11. स्वप्न
    सदियों से
    तुम्हारी आँखों में
    जो पल रहे हैं
    इतिहास होने से पहले
    उन्हें एक बार
    सूरज दिखा दो
    अरुण जी ,
    अनाम्स्कार !
    बेहद सुंदर !
    साधुवाद !

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  12. ghazab hai ye sapnon kee duniyaa.... ek javiya jo apne mausam badlne wala dikhaya hai ...wah ek dum naya hai mere liye..aur mere man men hairat paida karta hai...koi baat agar hairat paida kare to jahir hai usmen jadoo hai,...

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  13. आपका आभार अरुण जी इस सार्थक कविता के लिए

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