गुरुवार, 3 मार्च 2011

चार साल और हम

जब दुनिया मिलेनियम  वर्ष मना रही थी, मैं और ज्योति विवाह के बंधन में बंधे थे. एक कापीराइटर के पास क्या होता है अपनी पत्नी को देने के लिए. बस विज्ञापन सी कवितायें. आज के दिन फिर जब कार्य की विवशता के कारण  उसके साथ रहना नहीं हो रहा है, अपनी चौथी वर्षगाँठ पर लिखी एक कविता याद आ रही है, जो आज भी प्रासंगिक है.



कैसे गुजर गए
चार साल
समझते समझाते
लड़ते झगड़ते
प्यार प्यार में
मनते  मनाते 

कैसे गुजर गए
चार साल 

दीवारों को बनाया घर
तिनका तिनका जोड़ कर
रसोई में आयी खुशबू
दरवाज़ों पर लगे गमले
कभी गुस्से में लाल होकर
कभी प्यार में सुर्ख हो  कर
कैसे गुजर गए
चार साल 

मनाई कई कई दिवाली
खेले हर दिन होली
आसमां में देखे कई इन्द्रधनुष
बादलो पर होकर सवार
खोये खोये से हम
पाए पाए से हम
कैसे गुज़र गए
चार साल 

तुमने बटोरी  ख़ुशी
अपनी अंजुरी में
तुमने संजोये सपने
अपनी आँखों में
तुमने समेटा मुझे
अपने  आँचल में
तुमने भरा रंग
कुछ अलग सा कुछ चटक सा
अपने जीवन में
मेरे जीवन में
'अभि ' के जीवन में

कुछ ऐसे गुजरे
ये चार साल

27 टिप्‍पणियां:

  1. जितने भी साल बीते प्यार और सुर्ख हो ...

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  2. आपकी प्रस्तुति सराहनीय व् सुन्दर है .गहन भावो को समेटे यह रचना अद्भुत है .बधाई .

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  3. प्यार और समर्पण के भावो से लबरेज़ कविता बेह्द उम्दा है ……………ये प्रेम ऐसे ही आकाश की ऊंचाइयां छूता रहे…………क्या आज शादी की सालगिरह है?या आने वाली है?
    चलिए जब भी है हमारी तरफ़ से हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार करें।

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  4. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  5. तुमने बटोरी ख़ुशी
    अपनी अंजुरी में
    तुमने संजोये सपने
    अपनी आँखों में
    तुमने समेटा मुझे
    अपने आँचल में
    तुमने भरा रंग
    कुछ अलग सा कुछ चटक सा
    अपने जीवन में
    मेरे जीवन में
    'अभि ' के जीवन में

    कुछ ऐसे गुजरे
    ये चार साल
    Isse aur adhik kya chahiye??Eeshwar se dua hai ki aanewale saal bhee aise hee beeten!

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  6. हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनायें..सराहनीय व सुन्दर भावमय रचना..

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  7. कभी गुस्से में लाल होकर
    कभी प्यार में सुर्ख हो कर

    वाह!! एक रंग .. भाव अलग ... बहुत प्यारी कविता है ... भगवान् हज़ारों वर्षगाँठ लाये और आप हज़ारों कविताएँ लिखें ... बधाई स्वीकारें

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  8. जीवन रथ चलता रहा,बीत गए वर्ष चार।
    हम तो इतना ही कहे,मिले खुशियाँ अपार॥

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  9. और जीने को क्या चाहिए...
    चार सालों की कहानी यूं ही लिख दी...
    वाह...

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  10. aapne aalate aur rangoli se rachi kavita .. ghar patni grihathi aur khushiyan sab toh hai.. ladaayii hamen toh mili hii nahin !!!

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  11. सालगिरह मुबारक हो। इसी तरह चार सौ साल गुजर जाएं यह कामना है। घबराइए मत। प्रेम करने वाले पल में सदियां जी लेते हैं।
    *
    ग्‍यारह साल पहले लिखी गई कविता में ताजगी आज भी मौजूद है। आज की कविताओं में इस ताजगी की जरूरत है।

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  12. विवाह की विधा इन सब विविघताओं से भरी होती है, बस जी लें।

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  13. दीवारों को बनाया घर
    तिनका तिनका जोड़ कर
    रसोई में आयी खुशबू
    दरवाज़ों पर लगे गमले
    कभी गुस्से में लाल होकर
    कभी प्यार में सुर्ख हो कर.

    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ..
    बस भाव यही बने रहें बाकी जीवन का क्या है व्यस्तताएं तो चलती ही रहती हैं.

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  14. कभी गुस्से में लाल होकर
    कभी प्यार में सुर्ख हो कर
    कैसे गुजर गए
    sal to yu hi gujarte jate hai par in salon ki yaden isi tarah jehan me hamesha taza rahe yahi kamna hai...

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  15. कैसे गुज़र गए
    चार साल
    ये तो जिसने गुजारे हैं उसके दिल से पूंछो

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  16. सिर्फ गुजरे-बीते नहीं, मनाते भी चलें आगे के साल.

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  17. बहुत अच्छा बीता और आगे भी बीते इसी तरह हंसते मुस्कराते साल-दर-साल।
    बधाइयां और शुभकामनाएं।

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  18. bahut sunder bete ye saal
    aane wale saal inse bhi jyada khushiya laye
    badhai or subhkamnaye

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  19. सालगिरह मुबारक हो। इसी तरह चार सौ साल गुजर जाएं यह कामना है। घबराइए मत। प्रेम करने वाले पल में सदियां जी लेते हैं।
    *
    ग्‍यारह नहीं सात साल पहले लिखी गई कविता में ताजगी आज भी मौजूद है। आज की कविताओं में इस ताजगी की जरूरत है।

    THURSDAY, MARCH 03, 2011

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  20. अपकी पूरी उम्र ऐसे ही सुखमय बीते और हम सुन्दर कवितायें पढते रहें। शुभकामनायें और बधाई।

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  21. दीवारों को बनाया घर
    तिनका तिनका जोड़ कर
    रसोई में आयी खुशबू
    दरवाज़ों पर लगे गमले
    कभी गुस्से में लाल होकर
    कभी प्यार में सुर्ख हो कर
    कैसे गुजर गए
    चार साल

    yun hi bhaagte hain saal pyaar me

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  22. बहुत खूब अरुणजी..
    आपको और आपकी पत्नी को सालगिरह की शुभकामनाएं..
    आशा करता हूँ कि आप एक-दूसरे के सुख-दुःख के साथी हमेशा बने रहेंगे..

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  23. कामना है कि अगले 40 साल भी ऐसे ही गुजरें.

    बधाईयां व शुभकामनाएँ...

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  24. यही भाव, यही सोच बनी रहे ...... शुभकामनायें

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  25. :)........kuchh aisa hi samay hamara bhi beeta tha, ek dum chalchitra ke bhanti samne se gujar gaya...wo rented ek kamra...wo bed ke badle farsh pe gadda...aur 14 " ka tv..........:)

    god bless you...boss!!

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  26. दीवारों को बनाया घर
    तिनका तिनका जोड़ कर
    रसोई में आयी खुशबू
    दरवाज़ों पर लगे गमले
    कभी गुस्से में लाल होकर
    कभी प्यार में सुर्ख हो कर ...
    दिन यूँ ही गुज़रते रहें तो और बात ही क्या है ... मज़ा आ गया पढ़ कर अरुण जी ....

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