मंगलवार, 15 मार्च 2011

ताला


सुना  है
पहले के ज़माने में 
घरों में ताले नहीं लगाये जाते थे
यह भी सुना है कि
आज भी कई गाँवों  में 
लोग घरो में ताला नहीं लगाते 
सहसा विश्वास ही नहीं होता 
आज के समय में 
 
सोच सोच कर 
जकड जाता है दिमाग की
ना जाने क्यों बना ताला 
किसने किया अविष्कार 
क्या आवश्यकता रही होगी 
और पहली बार 
किसने लगाया होगा ताला 

ताला 
आदमी आदमी के बीच 
अविश्वास का 
पहला यन्त्र रहा होगा 
जब किसी  भाई ने 
अपने भाई से 
छिपाया होगा कुछ 
ताले के भीतर 
या फिर कोई 
छीन लाया होगा
किसी के हिस्से की रोटी

जब किसी के पास 
हुआ होगा जरुरत से अधिक 
बचा लिया होगा उसने 
भविष्य की खातिर 
या मन में उपज आया होगा 
कोई भेद, कोई लोभ 
यहीं पैदा हुई होगी आवश्यकता 
ताले के आविष्कार की 

किसी को 
जब मिल गया होगा
बिना श्रम के कोई साध्य 
या फिर किसी और के श्रम का साध्य 
जरुरत पड़ी होगी उसे
दुनिया से छिपाने  की
जरुरत पड़ी होगी 
ताले की 
भ्रष्ट्राचार की पहली कड़ी
ताले के निर्माण से शुरू हुई होगी 
निश्चित ही किसी चोर ने 
नहीं बनाया होगा ताला

कालांतर में 
ताला बन गया 
जीवन का अभिन्न अंग
घर में ताला
घर के भीतर तिजोरी में ताला 
फैक्ट्री में ताला 
दफ्तर में ताला
गाड़ी में ताला
कंप्यूटर में ताला
और इन तालों की रक्षा के लिए 
लगाये जा रहे हैं और भी कई  ताले 
तरह तरह के ताले
भरपूर उपयोग हो रहा है 
साधनों संसाधनों का 
सेना, हथियार सब जुटाए जा रहे हैं
ताले की रक्षा के लिए

आज हो रही है राजनीति 
ताले की
किसका ताला है 
कितना मजबूत
कौन खोल सकता है
किसका ताला
किसके ताले की चाबी
है किसके पास
कोई लगाना चाहता है
पेट्रोल पर ताला तो
कोई दावा करता है
उसके पास है
नाभकीय ऊर्जा के ताले की चाबी
कहीं नदी
कहीं पहाड़
कहीं जंगल
कहीं खदान तो
कहीं रेगिस्तान पर
जुगत लगाई जा रही है
ताला जड़ने की
सत्ता और इसके गलियारे में
होती है बस इसकी ही
जोड़ तोड़

कहीं कहीं
लगा दिया जाता है 
जबान पर ताला तो 
कहीं होता है ताला 
सपनों पर 
दुखद तो 
यह है कि 
लोग जड़ने लगे हैं 
ह्रदय पर भी ताला. 

28 टिप्‍पणियां:

  1. छोटी सी चीज़ पर कितने गहरे भाव दे गई .... बहुत खूब

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  2. Sonal jee...aise hi hain apne Arun jee........inka kavi hriday aise hi chalte chalte kisi bhi vastu pe atakk jata hai...aur fir ye uspar apne pen ko chala dete hain..:)

    waise abhi bhi Sani signapur ek aisa gaon hai, jahan log gharo me tale nahi lagate..:)


    har baar ki tarah ek baar fir se ek alag se bimb pe ek dum nayee rachna..:)

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  3. अविश्वास का पहला यन्त्र, बहुत सच कहा है आपने।

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  4. mann ko jakadne se , sochne se kya haasil hoga !sach to yahi hai n - कहीं कहीं
    लगा दिया जाता है
    जबान पर ताला तो
    कहीं होता है ताला
    सपनों पर
    दुखद तो
    यह है कि
    लोग जड़ने लगे हैं
    ह्रदय पर भी ताला.

    उत्तर देंहटाएं
  5. जिस दिन उपजा अविश्वास उसी दिन दिलो पर ताला लग गया…………एक बेहद गहन रचना।

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  6. ताला
    आदमी आदमी के बीच
    अविश्वास का
    पहला यन्त्र रहा होगा

    अरुण जी
    ताले ने कहीं पर किसी को सुरक्षित किया होगा तो किसी को असुरक्षित भी किया है , आपने जीवन के हर पक्ष को ताले के सन्दर्भ में देखने का प्रयास किया है ....सच में जहाँ लग जाता है ताला, वहां खो जाती हैं संभावनाएं और फिर हम नहीं बढ़ पाते आगे ...सच में ताले का लगना खुद को खोने जैसा है ....आपका शुक्रिया

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  7. अद्भुत व्यंजना.... ! इस कविता से मैं दो पंच-लाइन उद्धृत करना चाहुंगा,

    ताला
    आदमी आदमी के बीच
    अविश्वास का
    पहला यन्त्र रहा होगा

    कहीं कहीं
    लगा दिया जाता है
    जबान पर ताला तो
    कहीं होता है ताला
    सपनों पर
    दुखद तो
    यह है कि
    लोग जड़ने लगे हैं
    ह्रदय पर भी ताला.

    मतलब कि फिर से लास्ट बाल पर छक्का । धन्यवाद !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. कहीं कहीं
    लगा दिया जाता है
    जबान पर ताला तो
    कहीं होता है ताला
    सपनों पर
    दुखद तो
    यह है कि
    लोग जड़ने लगे हैं
    ह्रदय पर भी ताला.

    १-पता नहीं आप शिन्गणापुर कभी गए हैं या नहीं. वहां कोई भी अपने घरों में ताला नहीं लगाता. शिन्गणापुर शिर्डी से 75 km. दूर है.मैंने वहां जाकर देखा है.वहाँ शनि देव का बहुत विशाल मंदिर है.
    २-अन्य जगहों पर घरों में ताले हैं, दिलों पर ताले हैं ,होंठों पर ताले हैं.
    आपका हर बार नया untouched विषय चुनकर कविता लिखना मुझे अच्छा लगता है.

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  9. कहीं कहीं
    लगा दिया जाता है
    जबान पर ताला तो
    कहीं होता है ताला
    सपनों पर
    दुखद तो
    यह है कि
    लोग जड़ने लगे हैं
    ह्रदय पर भी ताला...
    कितना गहन विषय है.. आखिर क्यों सबसे पहले किसी को जरूरत पड़ी होगी इस ताले की... और आलम ये है की ह्रदय पर भी ताला..सुन्दर भावनात्मक रचना...

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  10. कहीं कहीं
    लगा दिया जाता है
    जबान पर ताला तो
    कहीं होता है ताला
    सपनों पर
    दुखद तो
    यह है कि
    लोग जड़ने लगे हैं
    ह्रदय पर भी ताला.

    एक ताले पर इतनी भावमयी और सार्थक प्रस्तुति...बहुत सुन्दर

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  11. ताले के आविष्कार की ज़रूरत कितनी सरलता से कह दी ...गहन चिंतन ताले पर ..

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  12. एक ताले का ज़िक्र आप से छूट गया।
    कुछ लोग लगा देते हैं अपने ब्लॉग पर ताला।

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  13. एक बार नियमानुसार मैंने एक व्यक्ति से उसका पहचान पत्र माँगा था और उसका जवाब था कि क्या आप मुझे चोर समझते हैं.. और तुरत मैंने पूछा कि आप घर में ताला लगाकर ज़रूर आए होंगे,क्या आपका पड़ोसी चोर है!और उनके पास कोई जवाब नहीं था.. आज आपने मेरे दिल की बात अपनी कविता में व्यक्त कर दी...

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  14. रॉय साहब बहुत सुंदर कविता होली की सपरिवार रंग विरंगी शुभकामनाएं |

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  15. धन्य हो गया आपके ब्लॉग पर आकर.आपकी सुंदर भावाभिव्यक्ति ने तो मेरी जुबान पर ही ताला लगा दिया है.अब कैसे लगा ये ताला आप ही बताएं? ताले का आविष्कार तो जन्म से ही हो जाता है शायद ,जब पिछली सब स्मिर्तियो पर लग जाता है ताला,नवीन जीवन की शुरुआत के लिए.
    मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' पर आप आयें,तो शायद कुछ ताले खुल पायें.

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  16. किसी निर्जीव वस्तु पर लिखकर मन को उद्वेलित करना आपका ट्रेडमार्क बनता जा रहा है |

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  17. acchi kavita hai arun sir..taale ke madhyam se bahut se badlavon kee taraf aapne ishara kiya hai...aisi kavita kahne men aapko maharath hasil ho gayi hai...lekin saath hee sath aap typed bhee hote ja rahe hain...ab naye prayogon kee taraf badhne ka samay aa gaya lagta hai...

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  18. बदलते वक़्त में इंसान का इंसान पर से विश्वास उठ रहा है , निश्चय ही दुखद है ह्रदय पर लगने वाले ताले।

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  19. सार्थक प्रस्तुति...बहुत सुन्दर

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  20. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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  21. अरुण जी,

    जज़्बात पर आने और हौसला बढाने का शुक्रिया......बहुत खूब पोस्ट लगी.....कितनी सही बात है ताला अविश्वास का ही तो प्रतीक है.....अति सुन्दर |

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  22. आपका ताला ज्ञान देख कर भौंचक्के हो गए...बहुत खूब लिखा है आपने...महाराष्ट्र में नासिक के पास "शनि शिन्गनापुर" नाम का गाँव है जहाँ शनि का बहुत प्रसिद्द मंदिर है...उस गाँव में कोई अपने घर दुकान दफ्तर में ताला नहीं लगता...यहाँ तक की बैंक में भी...और आजतक वहां कोई चोरी नहीं हुई...हमने खुद देखा है ये गाँव...अद्भुत है.

    नीरज

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  23. क्यों न इस ताले को ताले में रख दिया जाए...
    बहुत सुन्दर... और अंतिम पैरा तो लाजवाब...
    बहुत दिनों बाद आने के लिए माफी...

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  24. लोग जड़ने लगे हैं
    ह्रदय पर भी ताला. बेहद सुन्दर अंत !

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  25. ताला
    आदमी आदमी के बीच
    अविश्वास का
    पहला यन्त्र रहा होगा

    बहुत ही बढ़िया पंक्तियाँ .....बेहद सार्थक कविता

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  26. नि:संदेह किसी चोर ने नहीं बनाया होगा ताला।
    लेकिन चोर साहूकार ने जरुर लगाया होता ताला।

    ताले के माध्यम से
    सा्माजिक बुराइयों को खोल दिया।
    कवि के पास सभी तालों की चाबी होती है।
    जिससे वह खोल कर रख देता है सच
    कर देता है नीर क्षीर

    आभार अरुण जी

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  27. अब तो ताला और मनुष्य हर कार्यक्षेत्र में एक दुसरे के पूरक है .

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