शुक्रवार, 18 मार्च 2011

इस होली

इस होली
भर दूंगा
तुम्हारे आँचल को
हरे रंग से
जैसे भरा होता है जंगल
हरीतिमा से

इस होली

भर दूंगा
तुम्हारी आँखों में
नीला रंग
कि हो जाओ तुम
समंदर की तरह अथाह 

इस होली 

रंग दूंगा 
तुम्हारे चेहरे को
नारंगी रंग से
जैसे क्षितिज पर होता है
सूरज हर शाम


इस होली

भर दूंगा
तुम्हारा  अंग अंग
विश्वास के रंग से
ताकि  
समय और सीमा  से परे 
होली बसे
हमारे जीवन में
हर दिवस .

19 टिप्‍पणियां:

  1. अरुण जी आपने तो प्रकृति का सारा सोंदर्य ही उंडेलकर समा डाला है अपनी इस शानदार अभिव्यक्ति में.आशा है इस होली में आप अवश्य विश्वास के रंग भर देंगे अंग अंग में . समय और सीमा से परे आपकी हर दिवस होली होगी.
    होली की हार्दिक शुभ कामनाएँ .

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  2. प्रकृति की सुंदरता भावों में लपेट कर बहुत सुन्दर रंग बिखेरे हैं आपने.
    होली की बहुत बहुत शुभकामनाये.

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  3. अरुण जी, प्रकृति का सारा सोंदर्य इस हरे नीले और नारगी रंग में समाया है... सुन्दर, भावपूर्ण व प्रेरक अभिव्यक्ति...
    होली की हार्दिक शुभ कामनाएँ .....

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  4. प्राकृतिक सौंदर्य को किस खूबसूरती से उकेरा है…………बहुत ही सुन्दर भाव संजोये हैं…………समय की सीमा से परे विश्वास का रंग हो तो ज़िन्दगी सार्थक हो जाती है और हर रंग खुद-ब-खुद ज़िन्दगी मे समाहित हो जाता है………… होली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  5. फ़िर वे भी होली मय और हम भी होली मय

    होली की शुभकामनाएं

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  6. इस होली
    रंग दूंगा
    तुम्हारे चेहरे को
    नारंगी रंग से
    जैसे क्षितिज पर होता है
    सूरज हर शाम

    हमारा तो आपसे होली खेलने का मन कर रहा है ....

    ):):

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  7. अरुण भाई जी
    इस होली पर लिखी
    इस कविता पर
    कर दूंगा एक ऐसा कमेन्ट
    कि तुम में जग जाये कल्पना
    किसी महाकवि की तरह
    और तुम लिख देना हर बार कविता
    जीवन की तरह ...आपका आभार

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  8. इन्हीं विश्वास के ख़ूबसूरत रंगों की सब से ज़्यादा ज़रूरत है ,बहुत सुंदर
    आप को और आप के परिवार को होली बहुत बहुत मुबारक हो

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  9. बहुत सुन्दर रंग बिखेरे हैं...होली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  10. रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|

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  11. बहुत सुन्दर ! उम्दा प्रस्तुती!

    आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  12. होली विश्वास का ही तो पर्व है।
    आस्था और विश्वास ही तो हमें एक दूसरे से बांधता है।

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  13. रंगों की चलाई है हमने पिचकारी
    रहे ने कोई झोली खाली
    हमने हर झोली रंगने की
    आज है कसम खाली

    होली की रंग भरी शुभकामनाएँ

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  14. कितने रंग निखरे-बिखरे हैं यहां.बहुत सुन्दर.
    रंग-पर्व पर हार्दिक बधाई.

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