गुरुवार, 10 मार्च 2011

लिफ्टमैन

किसी भी
बहुमंजिले कार्पोरेट टावर में
होती  हैं कई कई लिफ्ट
जो चलती  हैं
भूतल के दो तल नीचे से
सबसे ऊपर मंजिल तक
और प्रत्येक लिफ्ट में
होता है एक लिफ्टमैन
पूरी तरह सुसज्जित
चेहरे पर मुस्कान लगाये
और संक्षिप्त अभिवादन करते
सुबह से देर रात तक
यांत्रिक सा


जिन लिफ्टों में
तय होता है
व्यापारिक नीतियों का सफ़र
विपणन की रणनीति
एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक
तटस्थ रूप से
होता है  खामोश
लिफ्टमैन


गिरते सेंसेक्स पर
जब कोई छलांग मारता है
सबसे ऊपरी  मजिल से नीचे
लिफ्टमैन ही
पहुंचाया होता है उसे
सबसे ऊपरी मंजिल पर
रोक लिया होता उसने
यदि नही होता
उसे निर्देश
तटस्थता का

वह जो
रोज़ शाम को
आती है दफ्तर के
बंद होने के बाद
पब्लिक रिलेशन के नाम पर
बिल्कुल अच्छा नहीं लगता
लिफ्टमैन को
वह नहीं ले जाना चाहता  है
लिफ्ट उसके निर्देश पर
चाहता है कि
पंहुचा दे उसे घर वापस
या फिर लगा दे
एक जोरदार चांटा
भाई स्वरुप

कई बार
जब देर रात को
उतर रहे होते हैं
वे दो
लिफ्टमैन
स्वयं ही नहीं उतरता मंजिले
उनके साथ
प्रार्थना करता है
ईश्वर से

जिसकी पिछले साल
हुई थी शादी
अभी पेट से है
उसे देख कर
लिफ्टमैन को
याद आती है
अपनी घरवाली
उसे सुध नहीं रहती
मंजिलो की

जब बंद हो जाते हैं
दफ्तर सभी
सुस्ताते हैं दोनों
लिफ्ट और लिफ्टमैन
बहुत बातें करता है
वह लिफ्ट से
अपनी पत्नी
होने वाले बच्चे के बारे में

आदमियों के
जाने के बाद ही
आदमी सा मह्सूस कर पाता है
यांत्रिक सा दिखने वाला
तटस्थ लिफ्टमैन

24 टिप्‍पणियां:

  1. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है

    बहुत ही गहरी बात कह दी....आपकी नज़र उन उपेक्षित से लोगों पर पड़ जाती है...और उनकी भावनाएं आप शब्दों में उतार देते हैं...जिन्हें सब देख कर भी अनदेखा कर जाते हैं...साधुवाद

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  2. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन
    ekdam alag tarah ki par bahut jaandar....

    उत्तर देंहटाएं
  3. भाई साहब,

    एक नग्न सत्य,
    वह जो
    रोज़ शाम को
    आती है दफ्तर के
    बंद होने के बाद
    पब्लिक रिलेशन के नाम पर
    बिल्कुल अच्छा नहीं लगता
    लिफ्टमैन को
    वह नहीं ले जाना चाहता है
    लिफ्ट उसके निर्देश पर
    चाहता है कि
    पंहुचा दे उसे घर वापस
    या फिर लगा दे
    एक जोरदार चांटा
    भाई स्वरुप....."

    और एक पंच लाइन,
    "आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन"

    मैं इन्हें आजकी कविता की उपलब्धि कहूँगा ! धन्यवाद !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. जब बंद हो जाते हैं
    दफ्तर सभी
    सुस्ताते हैं दोनों
    लिफ्ट और लिफ्टमैन
    बहुत बातें करता है
    वह लिफ्ट से
    अपनी पत्नी
    होने वाले बच्चे के बारे में

    आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन... bahut hi badhiyaa

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  5. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है

    यही सच है……………दूरदर्शी सोच का परिणाम है आपकी ये कविता……………एक अनकहे मन के भावो को खूबसूरती से समेटा है…………सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  6. pata tha...:)
    abhi maine apne blog ke followlist me jaise hi liftman padha, ek dum se mere man me aa gaya, ye kriti arun jee ki ho sakti hai..

    SACH MAIN aapki soch bhi puri tarah se kavyamay ho gayee hai, jisko bhi dekhte ho, turant usko shabdo me utar dete ho...

    dhanya hoon main!!
    aapke sannidhya me rah kar, kuchh na kuchh to asar kabhi na kabhi parega hi..!

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  7. सुन्दर और भावुक ..धन्यवाद..

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  8. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन

    एक नयें बिम्ब का सृजन , सच में सार्वजानिक स्थानों पर काम करने वाले व्यक्तियों को वहां आने वाले हर एक व्यक्ति की जानकारी होती है ..उस पर उनका तटस्थ बने रहना किसी तपस्या से कम नहीं ...क्या खूब लिखा है अरुण जी ...कमाल है

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  9. आज तीसरी बार आया हूँ लिफ़्टमैन के पास।
    सुंदर कविता चित्र के लिए आभार

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  10. एक सामान्य लिफ़्ट मैन पर कविता लिखने के बावज़ूद भी आपने सि कविता को जनवादी फॉर्मूले से दूर ही रखा है।

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  11. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन..

    कटु सत्य को उजागर करती .. तटस्थ सी रचना ..अंतिम पंक्तियाँ गहन बात कह गयीं

    उत्तर देंहटाएं
  12. अपनी भूमिका निभाने को विवश, बेबस जिंदगी.

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  13. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन

    -बहुत जबरदस्त!

    उत्तर देंहटाएं
  14. सबको चढ़ाने और उतारने वाला, वही रह जाता है।

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  15. कटु सत्य को उजागर करती कविता| धन्यवाद|

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  16. पता नहीं आप इतना अलग कैसे सोच पाते हैं...शायद लेखन प्रतिभा इसी को कहते हैं...:) काश मैं भी लिख पाता....

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  17. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन
    yatharth se milvati aapki prastuti bahut sarthak hai .badhai .

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  18. अद्भुत बस इतना ही कह सकती हूँ। शुभकामनायें।

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  19. और फिर शायद .....
    सबको ऊपर ..
    और ऊपर पहुँचाता हुआ
    सबसे नीचे
    और नीचे
    गिरता जाता है लिफ्टमैन

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  20. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन



    और...



    वह जो
    रोज़ शाम को
    आती है दफ्तर के
    बंद होने के बाद
    पब्लिक रिलेशन के नाम पर
    बिल्कुल अच्छा नहीं लगता
    लिफ्टमैन को
    वह नहीं ले जाना चाहता है
    लिफ्ट उसके निर्देश पर
    चाहता है कि
    पंहुचा दे उसे घर वापस
    या फिर लगा दे
    एक जोरदार चांटा
    भाई स्वरुप....."

    जैसे झकझोर दिया आपने....

    क्या कहूँ....

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  21. आदमियों के
    जाने के बाद ही
    आदमी सा मह्सूस कर पाता है
    यांत्रिक सा दिखने वाला
    तटस्थ लिफ्टमैन.

    आप बिलकुल नए और untouched विषय उठाकर कविता लिखते हैं.आपकी ये खूबी आपको परंपरागत लेखकों की भीड़ से एकदम अलग और खूबसूरती के साथ project करती है.GOOD.

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  22. तटस्थ लिफ्टमैन के जरिये सब कुछ तो कह दिया .बहुत खूब .

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  23. आपकी इस सुंदर भावाभिव्यक्ति को सलाम.ईश्वर आपकी सर्जन शक्ति को दिन प्रतिदिन विकसित करें व निखारें,यही प्रार्थना है मेरी.
    मेरे ब्लॉग पर आप आये इसके लिए आभारी हूँ आपका.

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