सोमवार, 13 जून 2011

पुराना नोट



आज मिले  है
कुछ पुराने नोट
माँ की पेटी में

एक नोट वो है
जो मिला था उसे
मुंह दिखाई  में
एक नोट है जो
बाबूजी ने दिया था
अपनी पहली कमाई से
मूल्य में कम होने के बाद भी
अमूल्य हैं वे नोट
जिसे माँ देखती रहती थी
अक्सर उलट पुलट कर
जैसे हवा रौशनी दे रही हो उन्हें
चुपचाप मुस्कुरा उठती थी
झुर्रियां मिट जाती थी अचानक
माँ के चेहरे से 
उन पुराने नोटों  को देख  

उनमें  एक नोट
वो भी था
जो बचा था उसे
बेचने पर प्यारी बछिया
बहुत रोई थी 
माँ और गैया उस दिन

आज   भी उस नोट को देख 
याद आ जाती है माँ को
बछिया और गाय 
कहती है मन में 
घूम जाता है कोई वीडियो 

एक छोटा सा नोट 
उसकी पोटली में है
और ये वो है 
जो मिला था
मुझे अपनी पहली तनख्वाह पर 
और रख दिया था  मैंने     
अपनी माँ के आँचल में 
हल्दी के निशान अब भी हैं
इस नोट पर
जो माँ ने लगाये थे पूजा के समय
इस नोट को देख 

अक्सर गीले हो जाते थे
उसकी आँखों के कोर
 
पुराने नोट की अहमियत

ख़त्म हो रही है यों तो     
माओं की तरह    
अँधेरे में हैं माएं   
टटोल रही हैं
पोटली में रखे पुराने नोट   

प्लास्टिक करेंसी के इस युग में  

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत कुछ पुराने नोटों की तरह खो गया है और प्लास्टिक ही हो गया है इस .... प्लास्टिक करेंसी के इस युग में .....कमाल की रचना

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  2. पुराने नोट का यही दर्द होता है।

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  3. पुराने नोट की तरह भावनाएं और संवेदनशीलता भी जैसे प्लास्टिक हो गई हैं.
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  4. भाई यहाँ भी कहन का सुंदर अंदाज और कथ्य का नयापन बेजोड़ है बधाई और शुभकामनाएं |

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  5. बहुत ही बढ़िया रचना, बधाई और शुभकामनाएं |

    - विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  6. कविता में भावनाओं के सितार पर अनगिनत धुन निकालने की यह अद्भुत कला है भाई| बछिया बेचने पर मिलने वाले नोट वाला हिस्सा द्रवित कर गया|

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  7. एक नोट वो है
    जो मिला था उसे
    मुंह दिखाई में
    एक नोट है जो
    बाबूजी ने दिया था
    अपनी पहली कमाई से
    मूल्य में कम होने के बाद भी
    अमूल्य हैं वे नोट
    जिसे माँ देखती रहती थी
    अक्सर उलट पुलट कर
    जैसे हवा रौशनी दे रही हो उन्हें
    चुपचाप मुस्कुरा उठती थी
    झुर्रियां मिट जाती थी अचानक
    माँ के चेहरे से उन पुराने नोटों को देख
    ... is muskaan ki kimat ek sahaj muskaan hi ho sakti hai...

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  8. छू लिया ...
    बेहद खूबसूरत रचना

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  9. बहुत दिनों बाद अपने अपने रंग कि संवेदनशील रचना लिखी ... सच है कि माँ के पास ऐसे छोटे छोटे नोट सहेजे होते हैं जो उनकी ज़िंदगी कि अमूल्य धरोहर होते हैं ..

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  10. पूरी रचना मार्मिक है...शब्द में भाव इस तरह गूंध दिए हैं के वो जगह जगह द्रवित करते हैं...पीड़ा को शशक्त अभिव्यक्ति दी है आपने...बधाई स्वीकारें.

    नीरज

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  11. पुरानी सहेजी हुई चीज़ों से कितनी ही यादें जुड़ी होती हैं...उन्हें छूते ही बीते सारे लम्हे सजीव हो उठते हैं.
    थोड़ी नौस्टेल्जिक करती सी संवेदनशील कविता

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  12. क्या कहूँ ......लफ्ज़ नहीं हैं मेरे पास.....सुभानाल्लाह .........

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  13. संवेदना छुपी है इस कविता में जिसे एक माँ का दर्द समझने वाला आसानी से समझ सकता है.

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  14. पुराने नोट की अहमियत

    ख़त्म हो रही है यों तो
    माओं की तरह
    अँधेरे में हैं माएं
    टटोल रही हैं
    पोटली में रखे पुराने नोट
    प्लास्टिक करेंसी के इस युग में ...

    बहुत मार्मिक रचना..आपकी रचनाओं की विषयवस्तु निश्चय ही प्रशंशनीय है...बहुत सुन्दर संवेदनशील प्रस्तुति..

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  15. ख़त्म हो रही है यों तो
    माओं की तरह
    अँधेरे में हैं माएं
    टटोल रही हैं
    पोटली में रखे पुराने नोट
    प्लास्टिक करेंसी के इस युग में ...


    रुला ही दिया आपने तो....

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  16. बहुत ही बढ़िया रचना, बधाई और शुभकामनाएं |

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  17. ह्रदय को समिद्ध करती रचना ..आह..

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  18. पत्तों की थाली
    कंकडों से भरा लाल मोटा भात
    करेले का अचार
    नदी का मटमैला पानी
    और बन्दूक साथ
    महुआ मेरा नाम,
    खबर है कि
    सरकार बना रही है
    हमसे युद्ध की नीति ...

    very touching and appealing . People are feeling so helpless in this indifferent govt.

    .

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  19. एक नोट वो है
    जो मिला था उसे
    मुंह दिखाई में
    एक नोट है जो
    बाबूजी ने दिया था
    अपनी पहली कमाई से
    मूल्य में कम होने के बाद भी
    अमूल्य हैं वे नोट
    जिसे माँ देखती रहती थी
    अक्सर उलट पुलट कर
    जैसे हवा रौशनी दे रही हो उन्हें
    चुपचाप मुस्कुरा उठती थी
    ...
    बस यही बात मिस होती है जब आपकी लेखनी से दूर होता हूँ...खैर काफी लम्बे अंतराल के बाद आया आपने भाई के पास...सोंच रहा था कहाँ से शुरू करूं पढना मुझे ये कविता सबसे मुफीद लगी विअसे तो आप हर शब्द स्तरीय होता है ...कहना ही क्या !

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