शनिवार, 15 जनवरी 2011

लकीरें

सिखाया गया था 
बचपन में 
एक लकीर को 
छोटा  करने के लिए
खींचनी चाहिए
एक बड़ी लकीर 
समय के साथ
बदल गई यह सीख
और छोटी कर रहे हैं
हम लकीरें
काट कर. 

दादा जी कहते थे
उनकी हाथ की लकीरे
देखनी है तो देखो
हल के मुट्ठे को
हथेलियों में 
कहाँ होती हैं लकीरें 
आम आदमी के 

पानी पर 
खींचते हुए लकीरें 
खो जाता हूं मैं 
याद करते हुए 
उन लकीरों को 
जो खींची थी  तुमने 
मेरी हथेलियों पर, 
अंतिम बार 
जब मिले थे हम . 

गुरुवार, 13 जनवरी 2011

बोनसाई 2

प्रतीक के रूप में

जब इस्तेमाल हो रहे हैं
जीवन के मूल तत्त्व जैसे 
जल वायु आकाश अग्नि और पृथ्वी 
दीवारों पर टंगे 'कृष्ण अर्जुन' के संवाद वाले पोस्टर से
मिल रही है प्रेरणा 
प्रकृति प्रेम परिलक्षित हो रहा है 
दीवारों के 'सिंथेटिक' रंगों से 
अचंभित नहीं करते 
टैरेस गार्डेन में 
आम, जामुन, लीची, 
नीम और पीपल 

अपने लघु आकार में 


दूरियों के 
सिमटने के साथ ही
सिमट रहे हैं 
अपने दायरे 
सरोकार जाहिर करने के लिए 
बदल गई है विधि 
ऐसे में अचंभित नहीं करता 
दो अपनों के बीच
स्पेस  का आग्रह
और कमरे के कोने में रखे 
बोनसाई का संक्रमण 

बोनसाई है 
अट्टहास 
हमारे लघु होते मानस पर 
सिकुड़ते दृष्टिकोण पर 
सूखते प्रेम कुंड पर 


घर के अन्तरंग कोनो में 
गर्वित हो शोभायमान बोनसाई 
खुश होता है 
देख हमारा  अकेलापन 
लघु होते  संस्कार और
विलुप्त  प्राय संस्कृतियाँ 

विशाल हो फैला लेता है 
अपनी जड़े 
हमारे मष्तिष्क पर 
बोनसाई 

सोमवार, 10 जनवरी 2011

बोनसाई

जब मैं बातें करता था
खेतों की
अच्छा लगता था तुम्हे
साथ चल दिया करती थी तुम
मेरे साथ एक यात्रा पर
पगडंडियों के सहारे
यादों से गुजरते हुए
चली जाती थी तुम
मेरे बचपन में
तोड़ लाती थी कुछ गेहू की बालियाँ
अमलताश के लरजते लटकते
फूलों  से लदी डालियों पर
झूल आया करती थी
और जब मैं कहता था
अमलताश के पीले फूलों के बीच 
सुन्दर लगता है तुम्हारा चेहरा
हंसी के फव्वारे में 
भीग जाते थे हम

मेरे गाँव के पोखर में
नहा आती थी तुम
बातों ही बातों में
और सुखाती थी अपने गीले केश
मद्धम धूप में
औरतों वाले  घाट पर
तुम्हारे क्लब के तरणताल से कहीं अधिक
अच्छा लगता था तुम्हे
मेरे गाँव के बाहर का वह पोखरा
जिसकी विशालता के कारण कहते हैं
दैत्यों ने खोदा था इसे और
यहीं तैरना सीखा था मैंने

मेरी साइकिल पर
घूम आती थी तुम
हाट बाज़ार
स्कूल कालेज
वैद्य जी का घर
पंसारी की दुकान
इकलौता पोस्ट ऑफिस
मेरे रिश्तेदारी तक को
जान गई थी तुम धीरे धीरे
निकटता उनसे हो गई थी तुम्हारी 
मुझसे कहीं अधिक

तुमने देना चाहा मुझे
अपने जीवन में स्थान
फिर एक दिन दिखाया
अपना विशाल और भव्य बैठक खाना
जिसमे रखे थे 

तरह तरह के बोनसाई
दर्शा रहे थे तुम्हारी पसंद को
कोने में रखा था एक बरगद
मेरे गाँव के बरगद सा.


और लौट आया मैं अपने गाँव.

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

माएं जानती हैं रैपर का मनोविज्ञान

विज्ञापन के प्रभाव से
जो आती है
छद्म मुस्कान
मासूम बच्चों के चेहरे पर
नहीं खोना चाहती हैं माएं


बनाती हैं संतुलन
बजट और  बाज़ार के बीच
रैपर के मनोविज्ञान की 

अदृश्य किन्तु मज़बूत डोरी से


मध्य वर्ग का 
मध्यम मार्ग अपनाती हुई 
कई माएं
खरीद लाती हैं कभी कभी 

ब्रांडेड महंगी चीज़ें
जैसे बिस्कुट, खाद्य सामग्रियां

चमकीले रैपरों में
जाकर बाहर अपने बजट से 


संभाल  कर रखती हैं
उन रैपरों को
महीनों तक
क्योंकि फिर से
भरना होता है उनमें 
तथाकथित लोकल वस्तुएं
और लडती हैं 

बाज़ार से
पूरी चालाकी से 


रैपर के मनोविज्ञान से 
कई बार हारता है बाज़ार
क्योंकि माएं 
जानती हैं अब भी
अपने बच्चों का मनोविज्ञान

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

हार्न

हार्न के अविष्कारक के बारे में 
नहीं जानते हुए भी
कहा जा सकता है कि
की गई होगी हार्न की खोज 
समीप में दूर खड़े व्यक्ति को बुलाने,
किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए.
सदियों से अलग अलग काल खंड और अवसरों पर
भिन्न भिन्न नामों से जाना गया है इसे 
आज कल हार्न कहते हैं
हार्न के बजने का 
होता है अलग अलग अर्थ 
जैसे जब एक बस का ड्राईवर 
बजाता है कनफोडू आवाज़ में जोरो से हार्न 
बस स्टैंड पर खड़ी सवारियों में 
मच जाती है होड़, शुरू हो जाती है 
धक्का मुक्की 
अवसरों को आकर्षित करने का चुम्बक
बन जाता है हार्न
इंजन की सीटी भी
एक तरह का हार्न ही है
जो प्रतीक बनी रही
जीवन की गति की सदियों तक

कुछ फैक्टरियों में
बजते हैं हार्न
साइरन के रूप में आज भी
जबकि आधुनिक कंपनियों में
स्वचालित पंचिंग मशीनो ने ले लिया है
साइरन का स्थान
जिनका बिना किसी शोर के भी
रहता है बहुत भय

वैसे होती तो हैं
साइकिल/रिक्शे की घंटियाँ भी  हार्न ही
लेकिन असर बहुत कम होता है
न पैदल सवार देते हैं रास्ता
न सुनते हैं दुपहिया चारपहिया ही
सर्वहारा हार्न कह सकते हैं इनको.

हो गए हैं हार्न
डिज़ाईनर
नक़ल करते हैं
नदियों की  /झरनों की
बाघ की  /सियार की 
कोयल की  /कौवे की  भी
मुर्गे की  बांग के स्वर भी आने लगे हैं
और आसानी से सुने जा सकते हैं
मोबाइल फ़ोन के रिंग टोंस में
आदमी को रखते हुए बैचैन

अस्पताल के एम्बुलेंस
और अति विशिष्ठ लोगों के काफिले के हार्न
होते हैं ध्वनि प्रभाव में लगभग एक जैसे ही
लेकिन प्राथमिकता में
मद्धम पड़ जाते हैं एम्बुलेंस
हाशिये पर खड़े आम जन की तरह

कुछ लोग
लगातार बजा रहे हैं हार्न
अलग अलग रंग के
अलग अलग रूप के
अलग अलग स्वर में
आदमी, जंगल, पहाड़, नदी झरनों को
करने के लिए विस्थापित 
डर लगता है इन लुभावने हार्नो से

जबकि
कुछ प्रतिबद्धित लोग
बजा रहे हैं हार्न
जगाने के लिए
जागे हुए लोगो को
इस प्रयास में कुछ हार्न
शहीद कर दिए गए ख़ामोशी से