शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

मोक्ष




1. 
मृत्यु 
स्वयं मोक्ष है 
वह गंगा तट पर हो 
या हो 
किसी स्टेशन प्लेटफार्म पर 


भगदड़ में 
अनगिनत पैरों के नीचे 
कुचलकर 
मिलता है मोक्ष 
अवाम को 


2.
मोक्ष की चिंता 
उन्हें नहीं होती 
जिनके लिए 
खाली होते हैं 
रास्ते/प्लेटफार्म/हवाई अड्डे/गंगा का घाट भी 

3.
मोक्ष के लिए 
जरुरी है करना 
पाप

जितना अधिक पाप 
मोक्ष का आडम्बर उतना ही अधिक 


4.
मोक्ष का 
होता है उत्सव 
पूर्व नियोजित 
सुनियोजित 



5.
मोक्ष भी 
एक किस्म का 
बाज़ार ही 
हम सब 
उसके ग्राहक 

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

माँ तुम्हारा चूल्हा


2010 में एक कविता लिखी थी "माँ तुम्हारा चूल्हा" और आज चर्चा है सभी अख़बारों में कि  देश के स्वस्थ्य को प्रभावित करने वाला कारक है - चूल्हा (हाउस होल्ड एयर पाल्यूशन). संयुक्त राष्ट्र संघ से डबल्यू  एच ओ तक इसे साबित करने पर तुला है। आश्चर्य है कि विकसित देशो में  ए सी, गाड़ियाँ, हवाई जहाज़ आदि आदि धरती को कितना नुकसान पहुचते हैं, इस पर कोई अध्यनन नहीं होता। वह दिन दूर नहीं जब लकड़ी को इंधन के रूप में इस्तेमाल पर पाबंदी होगी और सोचिये कि कौन प्रभावित होगा, साथ ही पढ़िए मेरी कविता भी। 



माँ
बंद होने वाला है
तुम्हारा चूल्हा
जिसमे झोंक कर
पेड़ की सूखी डालियाँ
पकाती हो तुम खाना
कहा जा रहा है
तुम्हारा चूल्हा नहीं है
पर्यावरण के अनुकूल

माँ
मुझे याद है
बीन लाती थी तुम
जंगलों, बगीचों से
गिरे हुए पत्ते
सूखी टहनियां
जलावन के लिए
नहीं था तुम्हारे संस्कार में
तोडना हरी पत्तियाँ
जब भी टूटती थी
कोई हरी पत्ती
तुम्हे उसमे दिखता था
मेरा मुरझाया चेहरा
जबकि
कहा जा रहा है
तुम्हारे संस्कार नहीं हैं
पर्यावरण के अनुकूल
तुम्हारा चूल्हा
प्रदूषित कर रहा है
तीसरी दुनिया को

पहली और
दूसरी दुनिया के लोग
एक जुट हो रहे हैं
हो रहे हैं बड़े बड़े सम्मेलन
तुम्हारे चूल्हे पर
तुम्हारे चूल्हे के ईंधन पर
हो रहे हैं तरह तरह के शोध
मापे जा रहे हैं
कार्बन के निशान
तुम्हारे घर आँगन की
हवाओं में

वातानुकूलित कक्षों में
हो रही है जोरदार बहसे 

कहा जा रहा है कि
तुम प्रदूषित कर रही हो
अपनी धरती
गर्म कर रही हो
विश्व को
और तुम्हारे चूल्हे की ओर से बोलने वाले
घिघियाते से प्रतीत होते हैं
प्रायोजित से  लग रहे  है
शोध अनुसन्धान
और तम्हारे चूल्हे के प्रतिनिधि भी

माँ !
मौन हैं सब
यह जानते हुए कि
जीवन भर जितने पत्ते और टहनियां
जलाओगी तुम,
उतना कार्बन
एक भवन के  केन्द्रीयकृत वातानुकूलित यन्त्र  से
उत्सर्जित होगा कुछ ही घंटे में

वे लोग छुपा रहे हैं
तुमसे तथ्य भी
नहीं बता रहे कि
तुम्हारा चूल्हा
कार्बन न्यूट्रल है
क्योंकि यदि तुम्हारे चूल्हे में
जलावन न भी जले फिर भी
कार्बन उत्सर्जन तो होगा ही
लकड़ियों से
बस उसकी गति होगी
थोड़ी कम
और तुम्हारा ईंधन तो
घरेलू है,
 उगाया जा सकता है
आयात करने की ज़रूरत नहीं

लेकिन बंद होना है
तुम्हारे चूल्हे को
तुम्हारे अपने ईंधन को
और जला दी जाएगी
तुम्हारी आत्मनिर्भरता
तुम्हारे चूल्हे के साथ ही .

माँ ! एक दिन
नहीं रहेगा तुम्हारा चूल्हा !

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

आने वाला समय भारतीय खुदरा बाज़ार के लिए दुश्वारी भरा होगा


लोकतंत्र में यदि संसंद किसी जन विरोधी नीति को मुहर लगा दे तो जनता शायद कुछ नहीं कर सकती। वर्तमान में खुदरा क्षेत्र में ऍफ़ डी आई पर हुई बहस ने यह साबित कर दिया है। बी एस पी, जो इस मुद्दे पर सदन में अनुपस्थित रही, उन्होंने ही रिलायंस को उत्तरप्रदेश में स्टोर खोलने से रोक दिया था। एक बिग बाज़ार या विशाल या फिर रिलायंस स्टोर से यदि पचास नजदीकी छोटे दुकानों की बिक्री बंद हो जाती है या कम हो जाती है तो और बड़े प्लेयर क्या कर सकते हैं, इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है।
ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम कालोनी में दो किलोमीटर के दायरे में लगभग दस छोटे बड़े मॉल हैं और सभी मॉल में एक दो रिटेल प्लेयर हैं एंकर के तौर पर। पिछले दिनों उनके दवाब के कारण कालोनी में लगने वाले साप्ताहिक हाट लगाने पर रोक लग गई थी लेकिन लोगों के भरी विरोध के बाद यह टल सका। ऍफ़ डी आई आने के बाद शायद यह संभव हो जाए। अभी भारत के रिटेल में जैसी घुसपैठ चीन के सामानों की हो गई है, वह और बढ़ेगी ही, कम नहीं होगी। कई विनिर्माण क्षेत्र जिसे खिलौने, रेडीमेड कपडे, बल्ब, इलेक्ट्रोनिक आइटमों में भारत के छोटे और मझौले उद्यम या तो बंद हो गए हैं या रुग्ण। इसके लिए नीति नियंताओं को भागीरथ पैलेस बाज़ार, चावडी बाज़ार और देश के अन्य थोक बाज़ारों में जाना चाहिए। निर्माण कम्पनियाँ अब इम्प्रोटर भर रह गई हैं। बेरोज़गारी बढ़ी है। वालमार्ट जैसे खिलाडी के आने के बाद उनकी सोर्सिंग भारत से होगी यह दिवास्वप्न भर है। जब अभी भारतीय कंपनिया यहाँ से सोर्स नहीं कर रही हैं तो कल कैसे होगा यह, समझ से परे है।
(चित्र सौजन्य : दी गार्डियन )

जो लोग वालमार्ट जैसे रिटेल जायंट से देश में बेरोज़गारी कम होने और कीमत घटने की बात कर रहे हैं, उनके लिए एक ताज़ा जानकारी यह है कि वालमार्ट के कर्मचारी शोषण के खिलाफ सड़क पर उतर गये हैं. बहुत पुरानी घटना नहीं है यह। 23 नवम्बर 2012 को अमेरिका के पचास से अधिक स्टोरों पर वालमार्ट के कर्मचारी हड़ताल पर गए हैं, क्योंकि कंपनी अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन, ओवर टाइम, भत्ते नहीं देता है, अधिकारों की बात करने पर सीधे छटनी करता है।

आने वाला समय भारतीय खुदरा बाज़ार के लिए दुश्वारी भरा होगा। छोटे व्यापारी जो आज स्वाबलंबी हैं वे कल रिटेल स्टोर के मैनेजर भर होंगे।

सोमवार, 12 नवंबर 2012

माँ और दीपावली



माँ के लिए
दिवाली आ जाता है
हफ्ता भर पहले ही

घर के कोने कोने तक
पहुच जाती है माँ
जहाँ होती है
चूहों  का  बसेरा
सीलन
अँधेरा
माँ दिवाली कर आती है
घर के अँधेरे कोनो में

सबसे आखिर में
माँ निकलती है
अपनी सबसे पुरानी पन्नी
जिसमे कई गत्तो के नीचे
पड़ी होती है
कुछ पुरानी कढाई,
कुछ जंग लगी सुइयां
कुछ अधूरे चित्र
जिन्हें इस बरस पूरा करने को सोचती है
यह सिलसिला
दशको पुराना है

होती हैं
इन्ही गत्तों के बीच
कुछ सपने
जिन्हें माँ छोड़ आई होती हैं
जिंदगी के किसी मोड़ पर
दिवाली पर
उन सीलन भरे सपनो को भी
धूप और दीया दिखाती है


माँ  के लिए
दिवाली का मतलब
कुछ सपनो को
फिर से अँधेरे गत्तो के बीच सहेज कर
रख देना होता है
और फिर रोशन करना होता है
घर, आँगन, चूल्हा, चौका, छत।

माँ के जीवन का तिमिर
किसी दीप से नहीं गया
सदियों से

(दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं )

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

औसत लोग



जो होते हैं
औसत
उनका कुछ भी नहीं
न धरती, न आसमान,
न  हवा न पानी
न होते हैं वे वोट ही

क्योंकि
वे लड़ नहीं सकते
कोई युद्ध
वे बन नहीं सकते
किसी क्रांति का हिस्सा
उनमे जोश का
गुबार नहीं होता
वे इश्वर के
अनचाहे संतान की तरह
होते हैं
अपने ही भरोसे

चूँकि औसत लोग
तन या मन से विकलांग नहीं होते
नहीं बनती कोई विकलांग नीति उनके लिए
उनके हिस्से
नहीं आती कोई
राजकोषीय सहायता
कोई विशेष योजना
वे हिस्सा नहीं होते
तथाकथित 'इन्क्लूसिव ग्रोथ' के

औसत लोग
न हाशिये के ऊपर होते हैं
न होते हैं हाशिये के पार
उनकी न कोई मंजिल होती है
न कोई राह

मैं
एक औसत व्यक्ति हूँ
संज्ञाहीन