मंगलवार, 30 जनवरी 2024

अमरीकी कवयित्री नाओमी शिहाब नी की कविता"एम्प्टी" का अनुवाद


रिक्त 

नाओमी शिहाब नी


मैं देखना नहीं चाहती 
क्या बाहर निकल गया 
जब भोर में पाया कि 
उलटी पड़ी है 
सपनों से भरी नीली मिट्टी की सुराही। 

क्या भविष्य रिस गया 
बूँद बूँद!  

अनुवाद : अरुण चंद्र राय 

मंगलवार, 23 जनवरी 2024

अमेरिकी कवयित्री कोलीन जे. मैकलेरॉय की कविता "द लॉस्ट ब्रेथ ऑफ़ ट्रीज' का अनुवाद

वृक्षों की खोई हुई साँसें 


कोलीन जे. मैकलेरॉय

----------------------------------------

शहरीकरण का शिकार होने से पहले यह शहर 
गायों के चारागाह सा था हरियाली से भरपूर 
नदियों में तैरते थे बांसों के बने नाव 
पक्षियां उनपर बैठ तिरती थीं बेख़ौफ़ 
उत्तर की तरफ जाने सड़क घिरी थी वनों से 
लोग कहते थे सौ सालों तक ये वन रहेंगे मौजूद 
उनदिनों सड़क के दोनों तरफ लगे थे घने वृक्ष 
जिसकी छाया में सुस्ताते थे 
घुमन्तु हिप्पी और चहकते बतख एक साथ 
ये  वर्षावन थे जिन्हें हमने समझ लिया था बेकार और फालतू 
जो अपनी छाया में देते थे सूरज की किरणों को भी आश्रय 
जिनकी चमक से हवाएं गुनगुनाती थी मधुर संगीत 
और पत्तियां  महकाती थीं हवाओं को खुलकर लेने के लिए सांस 
और हमने सोच लिया कि  इनका रचयिता
कभी नहीं लौटेगा पूछने इनका हाल 
और यह स्वर्ग बना रहेगा हमेशा हमेशा के लिए ! 

कितने गलत थे हम।  

-------

- अरुण चंद्र राय 

शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

अमरीकी ब्लैक कवयित्री ल्युसिल क्लिफ्टन की कविता द लॉस्ट वुमन

 

गुमशुदा स्त्रियां

---------

ल्युसिल क्लिफ्टन 

------

मैं जानना चाहती हूँ उन स्त्रियों के नाम 

जो  पुरुषों की तरह भीड़ बनाकर चलना चाहती थीं 

फैला कर अपनी बाहें , 

मैं उन पसीने से लथपथ स्त्रियों के नाम भी 

चाहती हूँ  जानना 

जो अपनी चर्बी घटाने के लिए 

बहाना चाहती थीं जिम में बेहिसाब पसीना।  


सोचती हूँ हम स्त्रियां ठहाका लगाते हुए 

एक दूसरे को क्या कहते 

पीते हुए बीयर अपने दोस्तों , अपनी टीम 

या अपनी बिगड़ैल बहनों के साथ ?


जो भी स्त्रियां आई मेरे जीवन में 

किसी भी तरह, कभी न कभी 

दुनिया में क्या है कहीं उनका नाम ! 


अनुवाद : अरुण चंद्र राय 

मंगलवार, 16 जनवरी 2024

ल्यूसेल क्लिफ्टन की कविता Blessings for Boats

अमरीकी ब्लैक कवयित्री ल्यूसेल क्लिफ्टन की कविता का अनुवाद 
नावों के लिए प्रार्थना
----------------------------

लहरें जो तुम तक 

पहुँचने वाली हैं अभी 

हमारे अधरों पर आई प्रार्थनाओं के सहारे 

तुम्हें ले  जाए भय  के पार 

तुम चूम  लो हवाओं को 

और तुम्हारे चूमने से 

हवाएं मद्धम हो जाएँ या बदल लें अपना रुख 

तुम आँखें खोल कर देखो नदी की बलखाती लहरों को 

और सहजता से पार कर जाओ 

इस किनारे से उस किनारे तक  । 

*****

अनुवाद : अरुण चंद्र राय 

गुरुवार, 4 जनवरी 2024

दिसम्बर

उदास करने वाला महीना
होता है दिसंबर
सफलताओं का डंका पीटने 
और असफलताओं के लेखा जोखा का भी
महीना होता है यह। 

खोने पाने का हिसाब 
पूरे साल के पास हो न हो  
लेकिन दिसंबर के पास होती है 
पूरी सूची 

इस सूची में 
कई लोगों के पाने की सूची 
होती है संक्षिप्त
खोने की इतनी लंबी 
कि कई बार वह
चली जाती है पृष्ठ से बाहर। 

प्रेम के अंकुराने
पहाड़ों के हरियाने
नदियों के लहराने
गेंहू के गदराने का भी महीना होता है
दिसंबर। 

आना मेरे करीब तुम 
किसी दिसंबर में
मेरे पाने वाली सूची की 
बनकर पहली प्रविष्टि । 

मंगलवार, 2 जनवरी 2024

चोटी वाले अर्ध-ईश्वर - तेनज़िन त्सुन्दुए

तेनज़िन त्सुन्दुए  की कविता "द पोनिटेल डेमीगाड" का अनुवाद 

(तेनज़िन त्सुन्दुए  ने यह कविता प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि आदिल जेस्सूवाला के लिए लिखी थी और टाटा साहित्य सम्मेलन में इसका पाठ किया था । )


एक घर 

घर के ऊपर घर 

घर के ऊपर और घर 

बांस की तरह खड़ा  हुआ 

एक घर 


एक धीमे धीमे चलते लिफ्ट में 

बहत्तर धड़कनों के बाद 

जब मैं पहुँच आपके पास 

पाया कि आप गए हैं फ्रांस 

अपनी प्रिय मल्लिका  के साथ 


आपने मुझे जिम्मेदारी दी 

घर की रखवाली की 

लेकिन मुंबई में एक तिब्बती के लिए 

यह काम भी एक सहारा बन जाता है 

आश्रय बन जाता है 

18 वीं मंजिल पर । 


मैंने खुलकर आपसे कहा कि 

मुझे अपने बगीचे में 

अपने गुलाबों और नासपातियों के साथ खिलने दीजिए 

मैं आपके पलंग के नीचे सो जाऊंगा 

और बाहर आईने के सहारे देख लूँगा टेलीविजन । 


एक समय था जब 

बंबई ने मुझे सिखाया 

एक बडा -पाव और कटिंग चाय पर जीना 

उस समय मैं बहुत भूखा और दुबला था 

इतना कि मैं जैसे गायब ही हो जाऊंगा 

कि मैं जैसे कोई पतंग हूँ जैसे बिना डोर के 

और आपने कहा था कि मैं उड़ते उड़ते , धक्के खाते 

किसी बच्चे के हाथ पड़  जाऊंगा । 


मैंने हमेशा ही आपने देखी है 

गणपती की छवि 

पीछे चोटी बांधे अर्ध-ईश्वर । 


बंबई डुबाती है मुझे 

चौपाटी पर बार बार 

सितम्बर में हर बार 

आप उबार लेते मुझे आकार 

एक शिक्षक, एक मेंटर ,, एक संपादक और अब 

एक महाकवि की भांति !