मंगलवार, 12 मई 2015

पन्ने


फड़फड़ा के रह जाते हैं 
पन्ने 
कभी कोरे रह जाते हैं 
कभी कोई लिख जाता है दुःख 
कोई लिख जाता है मृत्यु 
पतझड़ 
सूखा 
बाढ़ 
पन्ने अकेले टूट जाते हैं 
फड़फड़ा के रह जाते हैं 

नींद में पन्ने 
खुश हो जाते हैं 
जब तुम लिख जाती हो 
प्रेम !

9 टिप्‍पणियां:

  1. अहसासों को महसूस करना...फिर शब्दों में ढालना...कमाल है...

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  2. आओ मिल कर समेटें इन पन्नों को
    हम सबको जरुरत है इन्हीं कुछ पन्नों की

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  3. हृदयस्पर्शी भावपूर्ण प्रस्तुति.बहुत शानदार भावसंयोजन .आपको बधाई

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  4. प्रेम अगर लिखा रहे बहुत समय तक ... दिखाई दे जागने तक तो सार्थक हो जाते हैं पन्ने ...
    बहुत उम्दा भाव पूर्ण रचना ....

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  5. theek kaha panne ikathhe ho tabhi rah oaayege,,,bahut sunder....

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