धान के बीज
बो दिए हैं तालाब के किनारे किनारे
उम्मीद में कि बादल बरसेंगे
और पौध बन उगेंगे
फिर से खेतो में रोपे जाने के लिए
सुबह दोपहर शाम
दो दो घड़े की बहंगी बना
सींच रहे हैं
धान के बीज वाली क्यारियां
पुरुष, स्त्री,
जवान होते बच्चे और बच्चियां
गाते हुए गीत
उमस और पसीने के बीच
जेठ की दुपहरी में
साथ में कर रहे हैं प्रार्थना
बादलों से/इन्द्र से /मेढ़को से
/मंदिरों में /मस्जिदों में
ग्राम देवता से/स्थान देवता से
अपनी अपनी कुल देवियों से
उनकी प्रार्थनाओं और गीतों में
नहीं होता है कोई धर्म/जाति
होता है केवल
जल और जल