गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री

 दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री 

जो आपकी नज़रों में है 

वह मेरी नज़रों में भी हो 

जरूरी नहीं। 


मेरे लिए दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री जो है 

उसकी आँखों बहुत बड़ी बड़ी नहीं हैं 

फिर भी वह देखती है बड़े बड़े सपने 

अपने बच्चों के लिए 

मेरे लिए 

अपने लिए तो सपने देखने उसने कब के छोड़ दिये 


दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री के पेट पर हैं 

गहरी गहरी धारियाँ जिसे अङ्ग्रेज़ी में कहते हैं बर्थ मार्क्स

बहुत गर्व करती है वह इन धारियों पर 

शर्मिंदा नहीं होती 

हाँ साड़ी पहनते हुये छुपा लेती है 

कहते हुये कि निजी है उसका यह सौन्दर्य 


दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री की एड़ियाँ 

हैं खुरदुरी 

वे अक्सर भूल जाती हैं 

फटी एड़ियों को माँजना 

उनमें तेल लगाना 

जबकि बर्तन माँजते माँजते 

उनसे नाखून जाते हैं घिस 

और हर बार नाखून के नहीं बढ्ने पर 

जताती हैं अफसोस 

कहती हैं कि कराएगी नाखून पर कलाकारी 

और देकर बजट का हवाला 

हर बार रोक लेती है खुद को । 


बहुत महंगे कपड़े भी नहीं पहनती 

दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री 

बल्कि जो पहनती है 

वही हो जाता है अप्रतिम, अनमोल। 


दुनियाँ की सबसे खूबसूरत स्त्री 

नहीं मिलती है किताबों में, कहानियों में 

आभासी दुनियाँ में , पत्र पत्रिकाओं में

वह वहीं होती है आसपास 

परछाई की तरह चलते हुये !

शुक्रवार, 28 मार्च 2025

जरूरत के समय साथ निभाने वाले लोग

नदियों ने कब मना किया था
जल नहीं देने से 
खेतों के लिए 
पशुओं के लिए 
मनुक्ख की प्यास के लिए 
जो वह बांध दी गई !

बांधी गई नदियां 
अकेली बहती रही 
रिसती रही 
किसी ने नहीं पूछा उसका दुख 
उसकी पानी से बनी बिजली से 
रोशन होते रहे शहर ! 

कब हवा ने उठाई थी 
कभी आपत्ति कि 
सांस लेने से पहले उससे पूछो 
फिर भी उसे बना दिया गया 
जहरीला
जहरीले हवा को साफ करने के लिए 
बनाई गई नीतियाँ 
बनी योजनाएँ 
लेकिन सब हवा ही रही और 
हवा का दम इधर घुटता रहा
अंधेरी कोठरी में  ! 

वृक्षों ने कभी मना नहीं किया 
देने को अपनी छाया 
देने को अपने फल 
फिर भी काटा गया उन्हें 
देने के लिए रास्ता 
बसाने के लिए नए घर 
वृक्षों से बने सामान पर 
कभी नहीं लिखा गया इनका नाम 
ये रहे सदैव बेनाम, गुमनाम ! 

जरूरात के समय 
जो निभाते हैं साथ 
वे अक्सर ही 
काट दिये जाते हैं  जड़ों से 
या फिर बांध दिये जाते हैं 
गतिहीन कर दिये जाते हैं 
या फिर कर दिये जाते हैं दूषित
रहते हैं गुमनाम !




गुरुवार, 27 मार्च 2025

चैत

1. 

पेड़ों के लगातार कम होने से 

 कम हो रही है कोयल की कूक 

और आपके भीतर यदि नहीं उठ रही कोई हूक

तो आप नहीं जानते 

क्या है चैत का मास ! 


2.

लगातार बहते पछिया हवा से 

समय से पहले जल्दी पकने लगे हैं गेंहू 

उनके दाने हो रहे हैं छोटे 

और छोटे दाने के बारे में सोचकर 

यदि नहीं छोटा हो रहा आपका मन 

तो आप नहीं जानते 

क्या है चैत का मास ! 


3.

होली में नैहर आई बेटी को 

लिवाने नहीं आया दुल्हा 

बेटी की प्रतीक्षा और आतुरता से 

यदि नहीं नहीं आतुर हो रहा आपका हृदय 

तो आप नहीं जानते 

क्या है चैत का मास ! 


मंगलवार, 18 मार्च 2025

एकाकीपन



जब कोई सुबह

जगाए नहीं तुम्हें 

मेरी तरह

जब कोई रात में

प्रतीक्षा न करे 

आने की 

तेरी तरह

जब कोई गलतियों पर 

न हो नाराज 

तेरी तरह

जब कोई टोके नहीं

घर से बाहर निकलते हुए 

मेरी तरह

यह आजादी नहीं

एकाकीपन है ! 

बचा लो मुझे

इस एकाकीपन से 

बचा लूंगा तुम्हें भी 

इस एकाकीपन से ! 


शुक्रवार, 7 मार्च 2025

कैसे कोई प्रेम जता सकता है !

 सच कहता हूँ 

मैंने तुमसे प्यार नहीं जताया 

जब से मिला हूँ तुमसे 

मुझे लगी तुम धरती सी 

धैर्य से भरी 

मुझे लगी तुम पानी सी 

प्रवाह से भरी  

मुझे लगी तुम अग्नि सी 

तेज से भरी 

मुझे लगी आकाश सी 

विस्तार से भरी 

मुझे लगी तुम हवा सी 

गति से भरी 


अब बताओ भला 

जब कम पड़ रहे हों शब्द

जब हल्के लग रहे हों आभार के वचन 

कैसे कोई प्रेम जता सकता है 

उनके प्रति जिनसे है उसका जीवन, उसका अस्तित्व 


बस इतना ही कहूँगा कि

अब मेरा अस्तित्व है तुमसे !