मंगलवार, 16 जुलाई 2024

दोस्तों के बीच

 दोस्तों के बीच 

जब आप कहेंगे कि 

देश में कम हो रहे रोजगार 

तो वे आपको तर्क देंगे कि 

सरकार बना रही है लोगों को निकम्मा 

अपनी योजनाओं के जरिए । 


दोस्तों की बतकही में 

आप जब कहेंगे कि 

जितनी देर में चाय पी प्याली 

खत्म करते हैं हमलोग 

उतनी देर में एक फुटबॉल मैदान के बराबर जंगल 

हो रहा है खत्म 

तो वे आपको बताएंगे कि 

रील्स में कौन कर रहा है लीड 

या फिर किस यू-ट्यूबर के सबसे अधिक हैं फालोअर । 


दोस्तों के बीच 

इस बात पर चिंता करते हुए आप 

हो जाएंगे अकेले कि 

इस साल देश या कहिए दुनिया के कुछ हिस्से 

जलते रहे बढ़ते तापमान में 

या फिर जूझते रहे बाढ़ से 

या फिर बेमौसम बारिश से  कैसे

लाखों हेक्टेयर फसल कैसे खत्म हो गई !




रविवार, 16 जून 2024

पिता के कंधे

पिता के कंधे 
बने होते हैं 
इस्पात के ।

वे टूटते नहीं 
हवा, पानी या 
घाम से 
बल्कि बोझ के साथ
होते जाते हैं 
और अधिक पक्के ।

पिता के कंधे
बोझ से झुकते नहीं 
बल्कि और तन कर
हो जाते हैं खरे। 

बूढ़े होते पिता के कंधे
आश्श्वस्ति भरे हाथों को 
अपने कंधे पर पाकर 
चौड़े हो जाते हैं 
विशाल हो जाते हैं
आसमान हो जाते हैं। 

गुरुवार, 30 मई 2024

गजल


 (1)
वह यूं धीरे धीरे बदल रही है
 जिंदगी रेत सी फिसल रही है 

 (2)
बदला है मौसम कुछ इस तरह
रूह  बर्फ सी पिघल रही है 

(3)
हर बात पर हँसती भी वह कभी  
अब न किसी बात से बहल रही है 

(4)
बसंत जायेगा तो फिर आएगा 
कोयल है कह कर मचल रही है  

 (5)
जो दौड़ेगा गिरेगा भी दुनिया में 
इसी हौसले से दुनिया टहल रही है 

 (6)
हार जाएगी, नहीं छोड़ेगी हौसला 
यह जान बच्चों सी मचल रही है   

सोमवार, 20 मई 2024

मुझे क्या!


गर्मी
खूब गर्मी
जितनी गर्मी
उतने एसी
जितने एसी
उतनी गर्मी
और गर्मी
और एसी
और गर्मी
और एसी
मैदान में गर्मी
पहाड़ में गर्मी
रेगिस्तान में गर्मी
मैदान में एसी
पहाड़ों में भी एसी
रेगिस्तान में एसी
गाड़ी में एसी
रेल में एसी
जहाज में एसी
दफ्तर में एसी
होटल एसी
ढाबा एसी
बस में एसी
मेट्रो में एसी
और गर्मी
और एसी
और गर्मी
और एसी
........और फिर....
धरती की ऐसी की तैसी।

गुरुवार, 21 मार्च 2024

यदि आपके लिए पर्याप्त रोशनी नहीं है -एको सोपोव


विश्व कविता दिवस पर पढिए मेकडोनियन कवि एको सोपोव की एक कविता  का अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद । यूनेस्को वर्ष 1999 से 21 मार्च को विश्व कविता दिवस मना  रहा है । इस वर्ष यूनेस्को मेकडोनियन कवि की जन्म-शताब्दी भी मना रहा है । 
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यदि आपके लिए पर्याप्त रोशनी नहीं है
-एको सोपोव

यदि नहीं है,आपके लिए पर्याप्त रोशनी 
तो मुझे अपने साथ ले  चलिए 
कि हो जाऊंगा मैं रात, एक ऐसी रात जो जल जाए
लाने के लिए दिन । 

और यदि  नहीं है आपके लिए पर्याप्त प्यार 
तब भी मुझे अपने साथ ले  चलिए 
कि बन जाऊंगा  मैं रात की आँखों की पुतलियाँ 
ताकि आप देख सकें मेरी आँखों में 
चमकते हुए सितारे । 

यदि  आपसे कोई नफरत भी नहीं करता 
तब तो जरूर ही मुझे अपने साथ ले चलिए 
क्योंकि मेरे हृदय के तल  में  खदक रहा है नरक 
अनंतकाल से अनंतकाल के लिए । 

किन्तु यदि नहीं हूँ, मैं ही आपके लिए पर्याप्त 
फिर प्रश्न उठता है कि मैं हूँ ही क्यों ?
सिवाय इसके कि मैं आपको देखता रहूँगा 
अनवरत एकटक 
मिट  जाने तक । 

(अनुवाद : अरुण चंद्र राय )