किसी की खुशबू बसी है इस रुमाल में
कायनात में किसी की बातें हैं कमाल में
वह दिखे तो और देखने का जी करता है
नहीं देखूं तो आ जाती है वह खयाल में
नाम उसका लेती हैं मेरी धड़कने भी अब
क्या बताऊं कि वह नहीं किसी मिसाल में
जुगनू सी चमकती है हंसी उसकी
बना हूं गुलाम मैं उसके दुमाल में
धर्मों ने बांट दिए आवाम को अब
अजान अब शोर है, रंग नहीं गुलाल में
वाह बस अंतिम शेर में चूहा नाराज न हो जाए | (चूहा जो आपका शेर है :) ही ही )
जवाब देंहटाएंयह ग़ज़ल दिल को छू जाती है और बिना शोर किए बहुत कुछ कह जाती है। रुमाल, ख़याल और दुपट्टे जैसे बिंब प्यार को बेहद निजी बना देते हैं। मुझे अच्छा लगा कि इश्क़ सिर्फ़ चेहरा नहीं, खुशबू और याद बनकर चलता है। जुगनू वाली पंक्ति मुस्कान को रोशनी दे देती है।
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