जब दुनिया में चल रहा हो
युद्ध
भूख और प्यार का जिक्र करना है
देश को कमजोर करना !
जब आसमान में विचर रहे हों
बंबवर्षक विमान
खेतों में खड़ी फसल को बचाने की प्रार्थना करना है
देशद्रोह, जिसके लिए हो सकती है सजा भी !
सेना की भर्ती खुली है
बीच युद्ध के दौरान
और इसमें भर्ती होने से मना करना
राष्ट्र के लिए कर्तव्य की अवहेलना है
जबकि रोजगार के अवसर भेंट चढ़ गए हैं
युद्ध के उन्माद के !
युद्ध लड़ती तो सेना है
फिर भी इसके प्रभाव से कहां बचा रह सकता है
किसान, मजदूर, स्त्री और बच्चे !
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें