रविवार, 5 अप्रैल 2026

युद्ध में भूख

 जब दुनिया में चल रहा हो

युद्ध

भूख और प्यार का जिक्र करना है

देश को कमजोर करना ! 


जब आसमान में विचर रहे हों

बंबवर्षक विमान

खेतों में खड़ी फसल को बचाने की प्रार्थना करना है

देशद्रोह, जिसके लिए हो सकती है सजा भी !


सेना की भर्ती खुली है

बीच युद्ध के दौरान

और इसमें भर्ती होने से मना करना 

राष्ट्र के लिए कर्तव्य की अवहेलना है

जबकि रोजगार के अवसर भेंट चढ़ गए हैं

युद्ध के उन्माद के ! 


युद्ध लड़ती तो सेना है 

फिर भी इसके प्रभाव से कहां बचा रह सकता है

किसान, मजदूर, स्त्री और बच्चे ! 

7 टिप्‍पणियां:

  1. युद्ध का प्रभाव तो हर चीज पर पड़ता है, आज ही नहीं आने वाले कल को भी झेलना पड़ता है इसका असर

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  2. युद्ध का दुष्परिणाम सर्वविदित है
    सार्थक रचना

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  3. इस युग की भीषण विडंबना । आईना दिखाती रचना ।

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  4. सच में, यह कविता सीधे दिल पर चोट करती है और बिना घुमाए सच बोलती है। मुझे इसमें सबसे ज्यादा यह बात लगी कि युद्ध सिर्फ सीमा पर नहीं होता, वह हर आम इंसान की जिंदगी में घुस जाता है। आपने भूख, खेती और रोज़गार की बात उठाकर असली दर्द दिखाया है। ये भी सच है कि लोग अक्सर भावनाओं को देशभक्ति के नाम पर दबा देते हैं, जबकि असली असर आम लोगों पर पड़ता है।

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