मंगलवार, 4 मई 2010

किताब


क्या
तुमने भी
महसूस किया है
इन दिनों
खूबसूरत होने लगे हैं
किताबो के जिल्द
और
पन्ने पड़े हैं
खाली


क्या
तुम्हे भी
दीखता है
इन दिनों
किताबों पर पड़ी
धुल का रंग
हो गया है
कुछ ज्यादा ही
काला
और
कहते हैं सब
आसमान है साफ़


क्या
तुम्हे भी
किताबो के पन्ने की महक
लग रही है कुछ
बारूदी सी
और उठाये नहीं
हमने हथियार
बहुत दिनों से


क्या
तुमने पाया है कि
किताब के बीच
रखा है
ए़क सूखा गुलाब
जबकि
ताज़ी है
उसकी महक
अब भी
हम दोनों के भीतर

16 टिप्‍पणियां:

  1. किताबो के पन्ने की महक
    लग रही है कुछ
    बारूदी सी
    और उठाये नहीं
    हमने हथियार
    बहुत दिनों से


    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  2. क्या
    तुमने पाया है कि
    किताब के बीच
    रखा है
    ए़क सूखा गुलाब
    जबकि
    ताज़ी है
    उसकी महक
    अब भी
    हम दोनों के भीतर
    waah

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  3. बहुत शानदार..बेहद पसंद आई.

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  4. सरोकारी कविताएं...बेहतर...पंक्तियों के बीच में झांकने को मजबूर करती हुई....

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  5. खूबसूरत होने लगे हैं
    किताबो के जिल्द
    और
    पन्ने पड़े हैं
    खाली
    बेहद खूबसूरत
    बहुत अच्छी

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  6. सुन्दर कविताएं। मन को छूती हैं !

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  7. कितना कुछ कहती हैं किताबें ... अलग अलग एहसास लिए किताबें .........

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  8. कितना कुछ कहती हैं किताबें ... अलग अलग एहसास लिए किताबें .........

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  9. खूबसूरत होने लगे हैं
    किताबो के जिल्द
    और
    पन्ने पड़े हैं
    खाली
    bahut gahari bat kahi hai aapne,sunder,saral shabdo me.

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  10. खूबसूरत होने लगे हैं
    किताबो के जिल्द
    और
    पन्ने पड़े हैं
    आजकल हम इंसानों का भी यही हाल है
    क्या
    तुमने पाया है कि
    किताब के बीच
    रखा है
    ए़क सूखा गुलाब
    जबकि
    ताज़ी है
    उसकी महक
    अब भी
    हम दोनों के भीतर
    अरे हाँ कौन सी किताब कि बात चल रही है किसमें रखा था फूल जरा हम भी तो जानें उसका नाम

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