शनिवार, 8 मई 2010

सच का सच

सच
वो नहीं
जो
अखबारों के पन्ने पर
छपा होता है
या
टी वी चैनलों पर
मचा मचा कर शोर
दिखाया और
सुनाया जाता है

सच
पत्रकार के
कलमों की स्याही में
सूख रहा होता है
या फिर
उसके
वर्किंग टेबल के
नीचे पड़े डस्ट-बिन में
डर कर दुबका होता है
और अगले दिन
पेपर षड्दर में
बदल जाता है
चिंदियों में

सच
टी वी चैनलों के लिए
मुफ्त में काम कर रहे
स्ट्रिंगरों के कैमरों में
होता है
जिसे ना दिखाने के लिए
वसूली जाती है
रकम और
इस खबर से बेखबर
स्ट्रिंगर और
उसके कैमरे में दबा
सच
तोड़ रहा होता है
अपना दम

सच
होता है
ताकतवर
वसूल लेता है
अपनी भरपूर कीमत
और
हो जाता है
दफ़न
झूठ के साए में

यही
सच है
सच का

18 टिप्‍पणियां:

  1. पर सच का सच कोई नहीं देखता, सुनता ........बहुत ही बढ़िया

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  2. सच का सच ...
    सच में गहरे सच से मिलवाया है आपने ... यही आज का सत्य है .....

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  3. सच
    टी वी चैनलों के लिए
    मुफ्त में काम कर रहे
    स्ट्रिंगरों के कैमरों में
    होता है
    सच में सच तो यही है जिसका बयान आपने किया है
    सच अक्सर दफ्न हो जाते है या दफ्न होने की कीमत दे जाते हैं

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  4. ईमानदारी है आपमें ! शुभकामनायें !

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  5. Arun babu ye post aapake blog kee saarthakataa ko aur aage badhaati hai.

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  6. Bahut behtreen vichar hai
    ashok

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  7. ... बेहद प्रभावशाली है ।
    Sach ka Sach........

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  8. behad parkhi najar se dekhi avam rachi gai samsamyeekta ke vicharti kavita.

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  9. कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है।

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  10. इसी सच को सामने लाना सरोकारी कविता का काम है...
    बेहतर....

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  11. arun ji,
    sach ka sach, bahut uttam prastuti. in shabdon ne sach kah diya...
    सच
    होता है
    ताकतवर
    वसूल लेता है
    अपनी भरपूर कीमत
    और
    हो जाता है
    दफ़न
    झूठ के साए में

    यही
    सच है
    सच का

    bahut shubhkaamnayen.

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  12. सच को स्वीकारना तब कठिन होता है जब हम कुछ पूर्वाग्रह पाल बैठते हैं .सच का सच बेहतरीन कविता है .यह और भी अच्छी हटी यदि इसे विस्तार दिया जाता और जीवन के विविध पहलूओ को भी इसमे समाहित किया जाता .फिर भी कविता अपने वर्तमान स्वरुप में भी शानदार है.बधाई

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  13. सच
    पत्रकार के
    कलमों की स्याही में
    सूख रहा होता है
    या फिर
    उसके
    वर्किंग टेबल के
    नीचे पड़े डस्ट-बिन में
    डर कर दुबका होता है
    और अगले दिन
    पेपर षड्दर में
    बदल जाता है
    चिंदियों में

    its just brilliant, apki andolan kari lekhani bahut hi prabhav shali hai... hatts off to you..

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  14. सच
    होता है
    ताकतवर
    वसूल लेता है
    अपनी भरपूर कीमत..

    सच सच में सच होता है, न आधा न अधूरा न पूरा. सच सच होता है. बहुत खूब, प्रभावी रचना. शुभकामनाएं

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