सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

अहिंसा की समाधि

 जितनी अधिक

संहारक शक्ति होगी

होगी उतनी ही अधिक पूछ

उतने ही अधिक होंगे दोस्त 

संहार के जयघोष से 

अखबारों के पन्ने होंगे भरे

उतना ही अधिक बढ़ेगा 

बाजार में व्यापार । 


अहिंसा की समाधि पर

फूल चढ़ाने की परंपरा

शायद कभी खत्म न हो

इस सभ्य दुनिया में। 

3 टिप्‍पणियां:

  1. यह कविता आज की सच्चाई को बहुत चुपचाप लेकिन गहराई से कह देती है। आप दिखाते हैं कि ताक़त और हिंसा कैसे तालियाँ बटोर लेती हैं, दोस्त बढ़ा लेती हैं और बाज़ार चला देती हैं। आपकी पंक्तियाँ आईना दिखाती हैं, डाँटती नहीं।

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