जितनी अधिक
संहारक शक्ति होगी
होगी उतनी ही अधिक पूछ
उतने ही अधिक होंगे दोस्त
संहार के जयघोष से
अखबारों के पन्ने होंगे भरे
उतना ही अधिक बढ़ेगा
बाजार में व्यापार ।
अहिंसा की समाधि पर
फूल चढ़ाने की परंपरा
शायद कभी खत्म न हो
इस सभ्य दुनिया में।
सच है
धन्यवाद सर।
यह कविता आज की सच्चाई को बहुत चुपचाप लेकिन गहराई से कह देती है। आप दिखाते हैं कि ताक़त और हिंसा कैसे तालियाँ बटोर लेती हैं, दोस्त बढ़ा लेती हैं और बाज़ार चला देती हैं। आपकी पंक्तियाँ आईना दिखाती हैं, डाँटती नहीं।
सच है
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सर।
हटाएंयह कविता आज की सच्चाई को बहुत चुपचाप लेकिन गहराई से कह देती है। आप दिखाते हैं कि ताक़त और हिंसा कैसे तालियाँ बटोर लेती हैं, दोस्त बढ़ा लेती हैं और बाज़ार चला देती हैं। आपकी पंक्तियाँ आईना दिखाती हैं, डाँटती नहीं।
जवाब देंहटाएं