बर्फ़ीले तूफ़ान के बीच स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हुए कुछ विचार
येसेनिया मोंटिला
मैं अपने जीवन शानदार चीज़ों से घिरी रहना चाहती हूँ,
किन्तु सुंदरता तो पूँजीवाद है
यानी मुझे चीज़ों से प्यार करना
'खरीदने की क्षमता' के ज़रिए सिखाया गया था,
और अब मैं एक ऐसे देश में हूँ
जहाँ ज़िंदगी बस दिखावा और गुलाब है,
रोटी कभी नहीं।
मैं एक पूरे गाँव का पेट कैसे भरूँ
मैं एक पूरे गाँव का पेट कैसे भरूँ
जब मेरी एकमात्र काबिलियत
अपने लिए शानदार और सूंदर चीज़ें जमा करना है,
न कि उन्हें बाँटना?
हे भगवान, मैं कितनी गलत थी कि
मैंने हथियारों के बजाय कपड़े
और खेती के बजाय कविता की किताबें चाहीं।
मेरा प्रेमी अपने बगीचे से
मुझे काजू और बादाम भेजता है
और मैं उन्हें गौर से देखती हूँ,
यह सोचकर कि धरती की कोख से
फसल उगाने का एहसास कैसा होता होगा
मिट्टी में सने मेरे हाथ
रस्सी बनकर 'अच्छाई' को खींचते हैं
और माफ़ी माँगते हैं धरती से ।
वे हमें मार रहे हैं और
हम सब बस ऑफिस जा रहे हैं,
टीवी देख रहे हैं
बाहर से खाना मँगवा रहे हैं
कई बार लगता है कि
मुझे तो विरोध करना चाहिए था।
मौतें बर्फ़ की तरह जमा होती जाएँगी
मौतें बर्फ़ की तरह जमा होती जाएँगी
और हम सबको क्रांति के लिए अपनी जान देनी पड़ेगी।
मैं थक गई हूँ यह सुनकर कि
यह सब पेचीदा है, जटिल है
और आज संभव नहीं है।
वे कहते हैं कि इसका सम्बन्ध पैसे और ताकत से है,
लेकिन वे हमसे चाहते हैं कि हम भुला दें कि
हम प्यार कैसे करते हैं
प्यार किससे करते हैं
और प्यार क्यों करते हैं ।
बर्फीले तूफ़ान के बीच
वे चाहते हैं कि
हम घर के अंदर रहकर
अच्छे अच्छे व्यंजन बनायें
और बाहर चाहे लोग गोली से मरते रहें
हम घर के अंदर रहकर
अच्छे अच्छे व्यंजन बनायें
और बाहर चाहे लोग गोली से मरते रहें
हम चुप रहें !
(अनुवाद : अरुण चंद्र राय )
येसेनिया मोंटिला एक एफ्रो-लैटिना कवयित्री, शिक्षिका, संपादक और अनुवादक हैं। उन्होंने ड्रू यूनिवर्सिटी से कविता और कविता-अनुवाद में एमएफए की डिग्री हासिल की है। वे न्यूयॉर्क में रहती हैं।
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