1.
भीतर
कुछ चल रहा हो
और आपको समझ में नहीं आये
तो समझिये आप हैं
सृजन की प्रक्रिया में.
2.
सृजन के लिये
कई बार निर्माण भी होता है
जब गढी जाती है नई मूर्ति
विध्वंस के बाद
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