सोमवार, 3 अप्रैल 2023

मसखरे के हाथों में दे दो सत्ता की बागडोर


मुझे लगता था कि 

मेरे पास है समाधान

दुनियां भर की  समस्याओं का 

कि अगर  मैं किसी देश के राष्ट्रपति से मिल  लूं 

तो रोक लूंगा उसे अपने पड़ोसी राष्ट्र पर बम गिराने से । 


मुझे लगता था कि

यदि कभी किसी दंगाई से मिला तो

उसकी तलवार के नोक पर 

रख दूंगा एक गुलाब का फूल

और कहूंगा कि किसी को मारने से पहले देख ले अपनी जेब में रखी बेटी की तस्वीर एक बार 

मुझे यकीं था कि वह दंगाई नहीं रहेगा फिर । 


मुझे यह भी लगता था कि

देश की वित्तमंत्री तक यदि पहुंच जाऊं मैं

तो समझा लूंगा उन्हें कि

सीमा पर तोप से कहीं अधिक जरूरी हैं

मेरे गांव के स्कूल में शिक्षक, पंचायत में अस्पताल 

और वे थपथपा कर मेरी पीठ मान जायेंगे मेरी बात। 


कितना गलत था मैं

जब मेरी कोशिशों के सब बीज खोखले निकले

अंकुरित नहीं कर पाया एक भी  पौधा प्रेम और विश्वास का

भरोसे की कलम सूख गई नमी की कमी के कारण और 

अपनी तमाम कोशिशों के लिए कहलाया मैं मसखरा  । 


फिर कहूंगा, चाहे कोई सुने न सुने

मसखरों की बातें जो सुनती दुनियां

सीमाओं पर बाड़ नहीं होते

हाथों में हथियार नहीं होते

गुलाब की खेती होती

तलवारों की जगह हाथों में होते कलम

बस एक दिन किसी मसखरे के हाथों में दे दो दुनियाँ की बागडोर।

सोमवार, 27 मार्च 2023

युद्ध के लिए कब तक कोई रोये

 युद्ध अभी खत्म नहीं हुये 

युद्ध अभी खत्म भी नहीं होंगे 

फिर कब तक कोई रोये 

इस युद्ध के लिए । 


युद्ध में अब नहीं है वह भेद 

कि इसने किया है पहला प्रहार 

युद्ध में अब नहीं है वह संयम 

कि बैठ कर सुलझा लें मसले 

अब वे पक्ष भी नहीं  हैं जो कह दें कि 

दोनों पक्ष को बैठा कर करा दें सुलह 

फिर कब तक कोई रोये 

इस युद्ध के लिए । 

बुधवार, 21 सितंबर 2022

कैसे बनती है मां

मां के बारे में सोचते हुए
याद आती है हजारों बातें
उसका हंसना
उसका रोना
पसीने से लथपथ
लकड़ी वाले चूल्हे को फूंकते 
कंधे पर चढ़ाए
गरम गरम दालभात मसल कर खिलाते
डिब्बे में रोटी भुजिया स्कूल के लिए बांधते
बुशर्ट की बटन टांकते
स्वेटर बुनते
पुराने स्वेटर को उघाड़ नया स्वेटर बनाते
खेल धूप कर लौटने तक 
आंगन के मोहरी पर नजर गड़ाए
और फिर जीवन संगिनी के हाथ सौंप कर 
अलग हट जाते

याद नहीं मुझे मां की गर्भ में मैं कैसा था
गलत है कि मां केवल गर्भ में रखकर 
बच्चे को जन्म देती है
मां तो वह  बनाती है 
उस जैविक प्रक्रिया के बाद । 

सोमवार, 19 सितंबर 2022

मां का नहीं होना

 जैसे वृक्ष का  है

जड़ विहीन हो जाना 

नदी का है

जल हीन हो जाना 

पक्षी का है

पंख हीन हो जाना 

आग का है

तेज हीन हो जाना 

वायु का है

गति हीन हो जाना । 


मां का होना होता है

दुनिया का होना।  







शुक्रवार, 16 सितंबर 2022

मां का नहीं होना

 सूरज के होते हुए भी 

पसरा होता है अंधेरा 

चांद के होते हुए 

नहीं होती शीतलता 

नर्म दूब जब लगे 

तपता अंगारो सा 

फिर लगता है क्या होता है 

मां का नहीं होना।