बुधवार, 21 अप्रैल 2010

पूरी दुनिया हो तुम

ठीक है
दुनिया
के लिए
कुछ नहीं
तुम

लेकिन
किसी के लिए
पूरी दुनिया हो।

तुम्हारे
इर्द-गिर्द
धूमती है
मेरी सुबह
और
दोपहर
तुम्हारे आँचल की छाव में
विश्राम करता है

शाम को
मेरे थके हारे सूरज को
मिलता है
तेरी बाहों का ठाव

चाँद
तेरे पहलू में ही
बिताता है अपनी रात
बदलते करवटों के साथ
करता है
ए़क नई सुबह का
इन्तजार ।


इस सुबह
दोपहर
शाम और
रात के बीच भी
होते हैं
कई पहर
जहाँ
तुम
रहती हो
मौजूद
मेरे लिए .

5 टिप्‍पणियां:

  1. एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

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  2. चाँद
    तेरे पहलू में ही
    बिताता है अपनी रात
    बदलते करवटों के साथ
    करता है
    ए़क नई सुबह का
    इन्तजार ।


    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  3. चाँद
    तेरे पहलू में ही
    बिताता है अपनी रात
    बदलते करवटों के साथ
    करता है
    ए़क नई सुबह का
    इन्तजार ।
    kiska hai ye tujhko intejar ?????

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  4. बहुत सुंदर


    bahut khub


    shekhar kumawat


    http://kavyawani.blogspot.com/

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