शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

संज्ञा की परिभाषा

बेटे ने कहा
पापा
संज्ञा
की परिभाषा है
'किसी
वस्तु या
स्थान के नाम को
कहते हैं
संज्ञा '
क्योंकि
आपके लिए
व्यक्ति भी
ए़क वस्तु ही है
और
कहते हैं आप
आज के समय में
भाव का
जीवन में
नहीं है
कोई स्थान

निरुत्तर मैं !

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह, बेटे ने परिभाषा के जरिये एक गहरा सच कह दिया

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  2. its a intelligent creation... hats off to your creative mind...

    jahan na pahuche ravi, wahan pahuche kavi...

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  3. वाह !!!आज तो माहौल कुछ बदला हुआ लगता है.गंभीर विषय है. गंभीरता से सोचने के लिए कुछ समय चाहिए.लो हम तो चले कुछ मनन चिंतन करने

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  4. kavita kuch adhuri-adhuri si lagi,ya ho sakta hai jis manhsthiti main kavita likhi gai hai wo main samajh nahi paya hun.......?

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  5. bachche ki totli awaaj ne jindagi ke paribhasha ko badal diya........bahut khub!!

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  6. क्योंकि
    आपके लिए
    व्यक्ति भी
    ए़क वस्तु ही है
    वाकई लगता तो यही है कि आज व्यक्ति भी वस्तु है
    सुन्दर सार्थक

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