रविवार, 1 अगस्त 2010

कपडे सुखाती औरतें

बरसात के दिनों में
कपडे सुखाती औरतें
औरतें नहीं होती
प्रबंधक होती हैं

बाहर
जब धूप नहीं होती
कई दिनों तक
वे
घर के भीतर
खिडकियों और दरवाजे के बीच
बनती हैं पुल
पुराने बिजली के तार
या फिर
पुरानी नारियल या जूट की रस्सी की
और
फैला देती हैं
कपडे
मैनेजमेंट की भाषा में इसे
कहा जाता है
क्राइसिस मैनेजमेंट

औरतो को
होता है पता
कौन से कपडे पहले सुखाने हैं
कौन से बाद में
कौन से पहले सूख जायेंगे
और कौन से के सूखने में
लगेगा वक्त
वे कपडे
उसी क्रम में फैलाती हैं
स्कूल कालेजो में इसे
कई बार कहा जाता है
'इन्वेंटरी मैनेजमेंट' भी

वे बच्चों के कपडे
पहले सुखाती हैं
और सुखाते हुए
चिल्लाती भी हैं
बच्चों पर कि
बरसात के दिनों में
वे ज्यादा कपडे गीले करते हैं
फिर भी मुस्कुराती रहती हैं
औरतें


अपने अन्तरंग वस्त्रों को
छुपा के सुखाती हैं
घर के भीतर भी
कई बार
चुन्नी के
या फिर किसी और कपड़ो के नीचे
नहीं छोडती वें
मर्यादा की डोर
कपडे सुखाते हुए भी
बीच बीच में
वे अपना आँचल
ठीक करती रहती हैं
मानो
छत पर सुखा रही हैं कपडे और
कई आँखें कर रहीं हैं
उनका पीछा

कपडे सुखाने की कला
बहुत कुछ कह जाता है
औरतों के बारे में
लेकिन
कहाँ समझ पाए हैं हम
आज तक

जब
गीले मौजे मिलते हैं हमे
चिल्ला उठते हैं हम
बरसात के दिनों में भी
और कहा जाता है कि
औरतों का 'इमोसनल आई क्यू' ही
उनका दुश्मन है

फिर भी
औरतों को प्यार है
बरसात से
बूंदों से
हमसे
बच्चों से

25 टिप्‍पणियां:

  1. Ek gruhini se badhke koyi management guru nahi ho sakta! Gruhkruty dakshta ek kala hi hoti hai...! Bahut sundar rachna!

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  2. वाह ....बहुत सूक्ष्मता से किया गया निरिक्षण....सुन्दर अभिव्यक्ति

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  3. बरसात के दिनों में
    कपडे सुखाती औरतें
    औरतें नहीं होती
    प्रबंधक होती हैं
    samajh gaye aap-ganimat hai...hahaha

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  4. आपकी इस खूबसूरत कविता को पढ़कर मुझे अपनी ही कुछ लाइने याद आई जो मैंने बहुत पहले लिखी थी ----

    अलगनी पर टाँग दिया है उसने
    अपने सारे दुख
    निचोड़ कर
    फिर भी
    अभी गीला गीला है
    सबकुछ ।

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  5. bahut umda rachna hai...

    your narration style is impressive which creates a live moving image your your narration which is a great quality you posses and would take you to new heights...

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  6. अरुण जी
    नमस्कार !
    वाकई सुंदर अभिव्यक्ति है वो भी बारीकी से , कोई पढ़ा लिखा ही व्यस्थापन सही कर सकता घेरेलु महिला भी इतनी खूब सुरती से कर सकती है ऐसे कई उदाहरण हो अकते है मसलन रसोई , घर का खर्च आदि . आप ने सुन्दरता से नारी कि एक और भीतरी सुन्दरता को सामने रखा , साधुवाद
    सादर

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  7. मंगलवार 3 अगस्त को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ .... आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  8. मैनेजमेंट की भाषा में इसे
    कहा जाता है
    क्राइसिस मैनेजमेंट
    Sahi kaha! Ek mata aur gruhini se badhke aur koyi itna badhiya crisis management nahi kar sakta!

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  9. aisa management.........uff!!
    sir aap to ustad ho......:)
    itna sukshamta se varnan.....lagta hai aapne kuchh dino tak gahan nirikshhan kiya hai, kapre sukhate hue..........:)

    hai na...........:D

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  10. क्राइसिस मैनेजमेंट में तो औरते माहिर है
    सुन्दर रचना

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  11. गीले कपड़ों से कितना कुछ निचोड़ दिया इस कविता ने।

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  12. बहुत अच्छी प्रस्तुति .क्या कपड़े धोये और सुखाये हैं. पता चल गया की आप इस काम में बहुत माहिर हैं. अब नाम चाहें किसी का भी लगा दो क्या फर्क पड़ता है.

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  13. नमस्कार !
    अरुण जी
    आप ने सुन्दरता से नारी कि एक और भीतरी सुन्दरता को सामने रखा

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  14. arun ji,
    aurat ki zindgi, jine, sochne aur aam dincharya ki gatividhiyon ka bahut sukshm nirikshan aur nishkarsh nikala hai aapne. bahut sahaj bhasha mein auraton ke kaam ko saraha hai jise koi sochta bhi nahin. sahi kaha auraton ka har kaam perfect managment ka hota hai with emotional touch & effect.
    ye ek bahut bada sach hai jo aapne kah diya...

    और कहा जाता है कि
    औरतों का 'इमोसनल आई क्यू' ही
    उनका दुश्मन है

    aur isi emotional Iq ki wajah se wo achhi prabandhak bhi hoti hain par ghar mein samman bhi nahin paati.
    bahut sundar chalchitra ki bhaanti prastuti.
    saadar shubhkaamnaayen.

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  15. wah kapde sukhane ko bhi koii es njar se dekha sakta hai pata nahi tha bahut achcha laga

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  16. वाह भई वाह
    छत पर एक दिन
    क्‍या पहुंच गए
    लिख दी पूरी कविता।

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  17. कपडे सुखाने की कला
    बहुत कुछ कह जाता है
    औरतों के बारे में
    लेकिन
    कहाँ समझ पाए हैं हम
    आज तक

    waaaaaaaah kya baat hai.....
    yu tu kapre sukhana ek mamoli sa kaam hai....
    lakin uske her pal ka itna sunder mulayankan kerna sach mein isko kitna mahan bana diya hai.....
    nazariya ,nazer se bara hota hai.....

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  18. वाह ! सच औरत रब की बेहद खूबसूरत कृति है

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  19. कुछ कविताये कोई भी टिप्पणी नहीं मांगती |और उसमे है ये आपकी सशक्त कविता |कुछ ऐसे ही भाव है |
    मेरी इस कविता में "स्त्रियाँ "

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  20. कमाल की रचना है . कपडा सुखाने के एक दैनिक से लगने वाले काम में कितना बड़ा दर्शन छुपा है . बहुत बहुत साधुवाद .

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