शनिवार, 28 अगस्त 2010

आवरण

आवरण
के पीछे
रहता है सच

आवरण झुठलाता है
सच को
देता है
नया अर्थ
नया रूप

लेकिन कोई
आवरण नहीं
मेरा मुस्कुराता चेहरा
मेरी हंसी
मेरा उतावलापन
मेरे सपने
तेरे लिए

बिना आवरण के
मेरा प्रेम
सत्य है
जैसे
सूर्य का उदय होना
लेकिन
आशंकित होता है
मन मेरा
सूर्य की तरह ही
बादल कही ढक ना ले
अपने आवरण में

कहो ना
आवरण के हटने
बादलों के छंटने तक
तुम्हें रहेगा
मेरा इन्तजार

या फिर
सच को
झुठला कर
कर दोगे
ह्रदय के मध्य से
विस्थापित
ए़क आवरण का
लेकर सहारा
और लुप्त हो जायेगा
मेरा प्रेम ।

20 टिप्‍पणियां:

  1. अरुण
    यह वह कविता जिसकी मैं तुमसे उम्मीद रखता हूँ .निसंदेह सुन्दर कविता .बधाई .

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  2. अरुण जी यह वह कविता नहीं है जिसकी उम्‍मीद मैं आपसे करता हूं। निर्मल जी क्षमा करें।

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  3. बिना आवरण के
    मेरा प्रेम
    सत्य है
    जैसे
    सूर्य का उदय होना
    लेकिन
    आशंकित होता है
    मन मेरा
    सूर्य की तरह ही
    बादल कही ढक ना ले
    अपने आवरण में..

    बहुत खूबसूरत भाव भरे हैं इस रचना में ....

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  4. बिना आवरण के
    मेरा प्रेम
    सत्य है
    जैसे
    सूर्य का उदय होना
    लेकिन
    आशंकित होता है
    मन मेरा
    सूर्य की तरह ही
    बादल कही ढक ना ले
    अपने आवरण में... superb

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  5. यही तो भावों की स्थिति होती है हर पल प्रेम मे एक आशंका का आवरण रहता है………………मनोभावो को खूबसूरत चित्रण्।

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  6. आवरण ...बहुत अच्छी लगी रचना.

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  7. ओ छुपने वाले सामने आ, चुप चुप पे के इतना जी न जला.

    बेशक सुंदर कविता

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  8. विनम्र निवेदन है आपके कथन मे ! सुंदर !!!!!!!

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  9. आपकी कविता पढ़ने पर ऐसा लगा कि आप बहुत सूक्ष्मता से एक अलग धरातल पर चीज़ों को देखते हैं।

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  10. कहो ना
    आवरण के हटने
    बादलों के छंटने तक
    तुम्हें रहेगा
    मेरा इन्तजार

    par aaj koi ye wada kars kata hai kya..kyo ki intzaar nahi sabke bas ka

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  11. आपकी पोस्ट रविवार २९ -०८ -२०१० को चर्चा मंच पर है ....वहाँ आपका स्वागत है ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. कहो ना
    आवरण के हटने
    बादलों के छंटने तक
    तुम्हें रहेगा
    मेरा इन्तजार
    इंतजार से ही आपका सरोकार रहेगा
    युगों तक कायम आपका प्यार रहेगा

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  13. प्रेम आवरण नहीं मगर भयभीत है की आवरण में लिपट ना जाये ...
    फिर भी रहेगा तो प्रेम ही !

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  14. हर चेहरे पर कोई ना कोई आवरण है| बहुत सुन्दर कविता|

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  15. सच को
    झुठला कर
    कर दोगे
    ह्रदय के मध्य से
    विस्थापित
    ए़क आवरण का
    लेकर सहारा
    और लुप्त हो जायेगा
    मेरा प्रेम ।
    ....bahut sundar prasuti

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  16. फिर एक बेहतरीन प्रस्तुति.

    कहो ना
    आवरण के हटने
    बादलों के छंटने तक
    तुम्हें रहेगा
    मेरा इन्तजार

    एक बात कहना चाहूंगी की आवरण तो निःसंदेह होता है पर सच्चे लोगो के चेहरे पर जो होता है वो पारदर्शी होता है कभी झूठ बोलना हो या कुछ छुपाना हो तो उस पारदर्शी आवरण से झलकता है की ये जो कुछ है ये परिस्थिति जन्य है

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