गुरुवार, 5 अगस्त 2010

धान रोपती औरतों का प्यार

खेतों के बीच
घुटने भर कीच में
धान रोपती औरतों से पूछो
क्या होता है प्यार
मुस्कुराकर वे देखेंगी
आसमान में छाये बदरा की ओर
जो अभी बरसने वाला ही है
और प्रार्थना में
उठा देंगी हाथ

धान रोपती औरतों का प्यार
होता है अलग
क्योंकि होते हैं अलग
उनके सरोकार
उन्हें पता है
बरसेंगे जो बदरा
मोती बन जायेंगे
धान के गर्भ में समाकर
और मिटायेंगे भूख

उन्हें कतई फ़िक्र नहीं है
अपनी टूटी मडैया में
भीग जाने वाले
चूल्हे, लकड़ी और उपलों की
हां , उन्हें
फ़िक्र जरुर है
जो ना बरसे बदरा
सूख जायेंगी आशाएं

जब प्रेमी की याद आती हैं उन्हें
जोर जोर से गाती हैं वे
बारहमासा
और हंसती हैं बैठ
खेतों की मेढ़ पर
गुंजित हो उठता है
आसमान
ताल तलैया
इमली
खजूर
और पीपल
दूर ऊँघता बरगद भी
जाता है जाग
उनकी बेफिक्र हंसी से

फ़िक्र भरी आँखों
और बेफिक्र हंसी के
द्वन्द में जीता है
धान रोपती औरतों का प्यार

चलो हम भी करते हैं
ऐसा ही प्यार
धान रोपती औरतों सा प्यार

19 टिप्‍पणियां:

  1. "खेतों के बीच
    घुटने भर कीच में
    धन रोपती औरतों से पूछो
    क्या होता है प्यार"
    grameen parivesh mein rachi gai rachna prem ka aik adbhut roop samne lati hai.

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  2. इस कविता में नागर जीवन की जटिलता, आपाधापी, संग्राम, इन सबसे अलग उम्‍मीद और आंकाक्षाओं की अपरंपार दुनिया है।

    कवि की भाषिक संवेदना पाठक को ग्रामीण दुनिया की सैर कराने में सक्षम है।

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  3. बरसेंगे जो बदरा
    मोती बन जायेंगे
    धान के गर्भ में समाकर
    और मिटायेंगे भूख्।

    दुनिया का सबसे बड़ा सच यही है।
    अरुण जी आपने शब्दों के माध्यम से बढिया चित्र खींच है

    आभार

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  4. धन रोपती औरतों का प्यार
    होता है अलग
    क्योंकि होते हैं अलग
    उनके सरोकार
    उन्हें पता है
    बरसेंगे जो बदरा
    मोती बन जायेंगे
    धान के गर्भ में समाकर
    और मिटायेंगे भूख...amazing

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  5. rachanaa ke zariye gaanw dikhaane ki ek koshish.waise gaanw me bahut kuchh likhaa jaanaa baaki hai

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  6. यह अरुण की सही मायनों में एक पूर्ण कविता है -बधाई .

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  7. बहुत खूबसूरती से आपने ग्राम्य जीवन और उनकी अपेक्षाओं को लिखा है....सुन्दर अभिव्यक्ति

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  8. चलो हम भी करते हैं
    ऐसा ही प्यार
    धान रोपती औरतों सा प्यार
    ............
    बहुत ही सुंदर ।

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  9. शहर में रहने वाले हम शायद इस प्रकार की भावनाओ से अपरिचित रह जाते ... dhanyawaad

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  10. सुन्दर भावों से भरी हुयी........है आपकी रचना .

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  11. aapki rachna mein hamesha nayapan hota hai ..aur aap aise vishay lete hai..jo bahut had tak achute hote hai...ek baar phir ek sundar ..aur tajgi bhari rachna di hai aapne!jari rakhiye..shubhkamnayen1

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  12. फ़िक्र भरी आँखों
    और बेफिक्र हंसी के
    द्वन्द में जीता है
    धान रोपती औरतों का प्यार !

    ye iss desh ka durbhagaya hai ke hum apne kisano ke aur dhyan nahi dete... hum jinta hi uper uth jayein par iss desh ki jadein hamare kheto mai hi hai... jad katne se ped hara bhara nahi reh sakta hai... ye mera manna hai ke sarkar ko chod agar private sector 10 saal ke liye bhi iss taraf dhaan de to unka munafa to 6 gunna hoga hi aur ye desk 10 gunna taraki karega...

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  13. वाह्…………हमेशा की तरह जीवन दर्शन कराती रचना ।

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  14. चलो हम भी करते हैं
    ऐसा ही प्यार
    धान रोपती औरतों सा प्यार
    मैं तो तैयार हूँ

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  15. कितना सहज और मार्मिक। कृषक जीवन की परतों को उघारती पंक्तियां।

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  16. हां , उन्हें
    फ़िक्र जरुर है
    जो ना बरसे बदरा
    सूख जायेंगी आशाएं
    aisa hi hota hai pyar jo apani parvah kiye bina rakhta hai chinta doosaro ke sarokaron se...sunder bhav sunder abhivyakti....sundar chitran...

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  17. हम शहरी हैं
    हम नहीं कर पायेंगे
    ऐसा सच्‍चा प्‍यार
    हम तो करते हैं
    धन से प्‍यार
    गरीबों से बनाते हैं दूरी
    यही तो है
    शहरीकरण की मजबूरी।

    हमारा प्‍यार पैसा है
    चाहे वो कैसा है
    कैसे भी आया है
    बस हमारी तिजोरी में
    समाना चाहिए।

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