रविवार, 8 अगस्त 2010

दर्द बन जाता है प्रेरणा

दर्द
होता है
सबके जीवन में
अलग अलग रूप और रंग में
अलग अलग समय पर
होने वाले दर्द के अर्थ होते हैं
पृथक पृथक

दर्द
किसान के ह्रदय में होता है
जब मेड़ पर बैठा
देख रहा होता है
सूने आसमान में
और खेत निरीहता से
मांग रहा होता है
नन्हे पौधों के लिए जल
बहुत काला होता है
किसान के ह्रदय के दर्द का रंग

माँ
जब पहली बार
बेटी को स्कूल छोड़ कर
लौट रही होती है घर
उसके ह्रदय में भी
होता है उमंग का दर्द
और इस दर्द का रूप
नन्हे पत्तों सा होता है
और रंग
बिटिया के बालों में बंधे
रिबन सा टुह टुह लाल

किसी गाय की आँखों में
झांक कर देखो
वहां मिलेगा
असहाय दर्द
जब बछड़ा बिना दूध के
रम्भा रहा होता है
और बेच दिया जाता है
उसका थन
कई माओं की आँखों में भी
मिल जाता है
ठीक ऐसा ही दर्द

औद्योगिक परिसर में
सुबह सुबह समय पर पहुँचने की जल्दी में
भाग रही औरतों के दिलों में भी
होते हैं कई कई दर्द
बच्चे से अलग होने क़ा
दिन भर घूरती आँखों क़ा सामना करने का
और लौट कर वापिस आने पर
फिर से मसले कुचले जाने क़ा दर्द


ए़क दर्द
होता है जब
लौट रहा होता है
कोई याचना भरा खाली हाथ
मंदिर से

आस्था से भरे
ह्रदय में
देख कर दर्द
मुझे तुम्हारी स्मृति हो जाती है
जब तुमने कहा था
हँसते हुए
दर्द के बिना जीवन कैसा

इस दर्द से
झीनी झीनी रौशनी आती है

आशा की
और दर्द बन जाता है
प्रेरणा

11 टिप्‍पणियां:

  1. very well you have covered almost all forms of pains which one of the most sensitive human emotions.. congrates on a butiful poem...

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  2. सुंदर प्रस्तुतिकरण, शब्द चयन भावों को सजीव करने में सक्षम. बधाई.

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  3. किसी गाय की आँखों में
    झांक कर देखो
    वहां मिलेगा
    असहाय दर्द
    जब बछड़ा बिना दूध के
    रम्भा रहा होता है
    और बेच दिया जाता है
    उसका थन
    कई माओं की आँखों में भी
    मिल जाता है
    ठीक ऐसा ही दर्द...hmmmmmm

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  4. विभिन्न दर्दों को बहुत सजीवता से वर्णित किया है ...एक एक दर्द जैसे आँखों में तैर गया ....और सबसे अच्छी बात कि दर्द से प्रेरणा भी मिली...

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  5. dard ko apne anoothe nazriye se aapne bakhoobi paribhashit kiya hai!

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  6. कई दर्दों को आपने एक साथ लिख दिया .....सुंदर ।

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  8. जब दर्द सहन करने का निश्चय दृढ़ हो जाता है, वहीं से प्रेरणा की धार फूट निकलती है।

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  9. दर्द का इतना सशक्त चेहरा आपने दिखाया है उसके लिये आभारी हूँ……………वैसे दर्द ना हो तो जीना कैसा? दर्द के बिना तो जीवन का कोई भी रस अधूरा ही रहेगा।

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  10. इस दर्द से
    झीनी झीनी रौशनी आती है
    आशा की
    और दर्द बन जाता है
    प्रेरणा ......

    वाह !!!!

    पीड़ा को केवल अनुभूत नहीं कराती यह कविता ,बल्कि यह सुन्दर सन्देश भी देती है कि जिसने पीड़ा को प्रेरणा बनाया,उसीने सार्थक जीवन पाया...

    प्रेरनादायी,बहुत ही सुन्दर रचना...

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  11. आप ने दूसरों के दर्दो को समझने मैं जैसे कमाल कर दिया.

    ए़क दर्द
    होता है जब
    लौट रहा होता है
    कोई याचना भरा खाली हाथ
    मंदिर से


    --पर जो दर्द आम तौर पर सब से पहले परेसान करता है उसे शायद भूल गए. टूटे सपनो का दर्द..

    और अगर बुरा न मानो तो लिखूं..

    कायम चूर्ण न लिए जाने का दर्द..

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