जब कोई सुबह
जगाए नहीं तुम्हें
मेरी तरह
जब कोई रात में
प्रतीक्षा न करे
आने की
तेरी तरह
जब कोई गलतियों पर
न हो नाराज
तेरी तरह
जब कोई टोके नहीं
घर से बाहर निकलते हुए
मेरी तरह
यह आजादी नहीं
एकाकीपन है !
बचा लो मुझे
इस एकाकीपन से
बचा लूंगा तुम्हें भी
इस एकाकीपन से !
ये आजादी नहीं एकाकीपन ही है मगर इसी को आजादी समझा जाता है अब....
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंमार्मिक.. अभिनंदन।
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