मां के नहीं होने
और होने के बीच का अन्तर
मां के रहते
कभी समझ नहीं आता
और जब समझ में आता है
मां फिसल जाती है
समय की मुट्ठी से
रेत की तरह
मुट्ठी से फिसला हुआ रेत
कब लौटा है मुट्ठी में।
मां के नहीं होने
और होने के बीच का अन्तर
मां के रहते
कभी समझ नहीं आता
और जब समझ में आता है
मां फिसल जाती है
समय की मुट्ठी से
रेत की तरह
मुट्ठी से फिसला हुआ रेत
कब लौटा है मुट्ठी में।
प्रस्तुत है डी एच लारेंस की छोटी कविता सर्च द ट्रुथ का अनुवाद ।
सत्य की खोज
डी एच लॉरेंस
अब और कुछ नहीं खोजें, कुछ भी नहीं
सत्य के सिवा ।
धैर्य बनाकर प्रयासरत रहें एवं सत्य को प्राप्त करें ।
अंत में , स्वयं से प्रथम प्रश्न करें
:
ओह ! कितना बड़ा मिथ्यावादी हूँ मैं !
अनुवाद :
अरुण चन्द्र राय
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Search for Truth
D H Lawrence
Search for nothing any more, nothing
except truth.
Be very still, and try and get at the truth.
And the first question to ask yourself is:
How great a liar am I?
प्रस्तुत है डीएच लारेंस की एक और छोटी कविता - रिलेटिविटी का अनुवाद । छोटी कविता में डीएच लारेंस अत्यंत गूढ बिम्ब पैदा करते हैं जिनका अनुवाद अत्यंत कठिन हो जाता है । एक सफल/असफल कोशिश देखिये ।
सापेक्षता
डी एच लारेंस
मुझे पसंद हैं सापेक्षता और क्वांटम
सिद्धांत
क्योंकि मैं उन्हें नहीं समझता
और मुझे ऐसा महसूस होता है कि
किसी हंस की भांति अंतरिक्ष घूम रहा
है यहाँ से वहां
वह बैठ नहीं सकता एक स्थान पर होकर स्थिर ताकि माप लिया जा
सके
उसका:
या फिर कोई आवेग से भरा परमाणु हो
जिसका मन बदल रहा है बार बार।
अनुवाद अरुण चंद्र रॉय
Relativity
D H Lawrence
I like relativity and quantum
theories
because I don’t understand them
and they make me feel as if space
shifted about like a swan that can’t settle,
refusing to sit still and be
measured;
and as if the atom were an
impulsive thing
always changing its mind.
अमरीकी कवि डी एच लारेंस को अङ्ग्रेज़ी कविता में "इमेजिस्ट" कवि के तौर पर माना जाता है जब उन्होने छोटी किन्तु विम्ब प्रधान कवितायें लिखी। ऐसी ही एक कविता है "ग्रीन" जो 1914 में इमेजिस्ट कविताओं के एक संकलन में प्रकाशित हुई थी । कुछ लोग इस कविता में हरी आँखों को उनकी प्रेयसी 'फ्रीदा' की आँखें कहते हैं । प्रस्तुत है इस छोटी कविता के अनुवाद की कोशिश ।
हरा
डी. एच. लॉरेंस
भोर थी हरे सेब की तरह
आकाश था हरे अंगूर की तरह धूप में टंगा
इन दोनों के बीच चाँद लग रहा था मानो हो कोई सुनहरी पंखुड़ी
उसने अपनी आँखें खोलीं, और
वे चमक उठीं हरी, उदास उजड़े हुये फूल की तरह
पहली बार, हाँ, मैंने पहली बार देखा ऐसा ।
अनुवाद : अरुण चन्द्र राय
Green
D. H. Lawrence
The dawn was apple-green
The sky was green wine help up in the sun,
The moon was a golden petal between.
She opened her eyes , and green
They shone, clear like flowers undone
For the first time, now for the first time seen.
डी एच लारेंस प्रसिद्ध अमरीकी उपन्यासकार, कहानीकार और कवि हुये हैं । एक ओर जहां उन्होने "संस एंड लवर्स" जैसा उपन्यास लिखा है वहीं उन्होने बहुत छोटी छोटी कवितायें भी लिखी हैं जिनकी समीक्षायें कई कई पृष्ठों में की गई हैं । ऐसी ही एक छोटी कविता - सेल्फ पिटी के अनुवाद की कोशिश कर रहा हूँ। पढ़िएगा ।
आत्म-करुणा
Self-Pity
I never saw a wild thing
sorry for itself.
A small bird will drop frozen dead from a bough
without ever having felt sorry for itself.
- D H Lawrence