शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

२१ वी सदी में प्यार का इजहार


तुमने जो
एन्टर किया
मेरे ह्रदय में
शिफ्ट हो गए
मेरे भाव
और
कण्ट्रोल खो दिया
मैंने
स्वयं पर से


जब से
तुमने
इन्सर्ट किया है
प्रेम
मेरे दिल में ,
डिलीट हो गए हैं
सभी अवसाद


अब
"होम" हो गया है
तुम्हारा दिल
और
जीवन के
सभी रास्ते
तुम तक पहुँच के ही
"एंड" होते हैं


ए़क बार जो
कैप्स लाक कर लिया
तुम्हे
मैंने अपने दिल में
नहीं काम करता कोई
बैक स्पेस


हमारे तुम्हारे बीच
ना हो कभी कोई
स्पेसबार
ना हो कोई
एस्केप बार
कोई टैब भी ना करे काम
और
स्क्रोल लाक हो जाएँ
हम और तुम
सदा के लिए

15 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय भाई,
    आपने छोटी कविताओं में हिन्दी-अंग्रजी शब्दों का इस्तमाल करके भी भाव जगत को बनाए रखा है | भाषा कोइ भी हो, कविता की पहली शर्त उसके भाव को, संवेदनाओं को जगाने का कार्य होना चाहिए | जो आपने किया है, मगर अभी भी थोडा अच्छा कार्य करें, ऐसी शुभकामना के साथ....

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  2. सरलता और सहजता का अद्भुत सम्मिश्रण बरबस मन को आकृष्ट करता है । चूंकि कविता अनुभव पर आधारित है, इसलिए इसमें अद्भुत ताजगी है ।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    स्‍वच्‍छंदतावाद और काव्‍य प्रयोजन , राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  3. ए़क बार जो
    कैप्स लाक कर लिया
    तुम्हे
    मैंने अपने दिल में
    नहीं काम करता कोई
    बैक स्पेस !!!!!!!!!!!!!!
    :):):):):)

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  4. अब लैपटॉप पर मुझे आपकी कविता दिखायी पड़ रही है।

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  5. आधुनिक युग की आधुनिक भाषा में आधुनिक प्रेम का आधुनिक इज़हार ...प्रवीण जी की बात साक्षात् हो रही है ..:):)

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  6. वाह जी वाह ………………आधुनिक प्रेम को अच्छा लपेटा है शब्दो के जाल मे…………………बस ये प्रेम एक बार कही वायरस का शिकार नही होना चाहिये नही तो हमेशा के लिये टा टा बाय बाय कर जायेगा।

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  7. अच्छी लगी ये कविता. एंटी वायरस लगाया क्या ??? एंटी वायरस बुलया क्या???? मैं हूँ ना !!!!ये कविता मेरे विचारों से बहुत मेल खाती है और मेरी कविता "दूजा ब्याह" की याद दिलाती है

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  8. वाह जी वाह
    वाह जी वाह
    वाह जी वाह
    वाह जी वाह
    वाह जी वाह

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