गुरुवार, 21 अक्तूबर 2010

एक दुआ है

एक दुआ है
कि घर से निकली बेटी
लौट आये
सही समय पर

एक दुआ है
कि किताबों के बोझ तले
मेरे बेटे का बचपन
कुछ पल के लिए ही
लेकिन लौट आये

एक दुआ है
कि झरोखे से
जो आती है धूप
मेरे एक मंजिले ढहे मकान में
न सूखे  कभी
अट्टालिकाओं की गर्मी से

एक दुआ है
कि कोई बेरोजगार
न खा जाये
मेरी नौकरी
कम पगार में

एक दुआ है
कि तुम्हारे गमले में खिले
वो गेंदे का फूल
जिसका पौधा
दिया था मैंने
तुम्हारे जन्मदिन पर

एक दुआ है
कि हंसी तुम्हारी यो ही
रहे प्रखर 
जब तक रोशन  रहे
ये सूरज
युगों  तक

एक दुआ है
कि कम से कम
एक दुआ तो
हो जाए कबूल
उसकी चौखट पर 

23 टिप्‍पणियां:

  1. इश्वर आपकी ये नेक दुआ कबूल करे...आमीन.

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह! क्या खूब दुआ है और इतने सच्चे दिल से की गयी है तो क्यूं ना कबूल होगी……………एक बहुत ही खूबसूरत रचना।
    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (22/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. khudaa kre apki yeh duaa sht prtisht khuda ishvr bhgvaan qubul kre . akhtar khan akela kota rajsthan

    उत्तर देंहटाएं
  4. उसकी चौखट का तो नहीं पता... अगर वो सुनता है तो अपनी दुआओं में हमें भी शामिल समझें.. अपनातो एक ही फ़लसफ़ा हैः
    .
    जानकर ये,ख़ुदा से कुछ न कहा,
    वो मिरा हाल जानता होगा!

    उत्तर देंहटाएं
  5. भगवान करे आपकी सारी दुआयें कबूल हो जायें।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अंत में भगवन को चोईस दे कर सोच में डाल दिया...अब वो आपकी कौन से दुआ को कबूल करें ?

    :)

    सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  7. एक दुआ है
    कि कम से कम
    एक दुआ तो
    हो जाए कबूल
    उसकी चौखट पर
    hui jo ek dua kabool to sukun ke tale hausla aur badhega

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुंदर कविता ...जो दूसरों के लिए दुआएँ करता है ...उसकी दुआ कभी खाली नहीं जाती ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. भगवान के सथ कौन बनेगा करोड़पति तो नहीं खेल रहे हैं न!!पता नहीं वो देता है कि नहीं... अगर मुझे मौका मिला तो कोई एक नहीं सारी की सारी दुआएँ कबूल करवाकर ही मानूँगा... बकुअल राजेश रेड्डीः
    दिल भी इक ज़िद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह,
    या तो सब कुछ ही इसे चाहिये, या कुछ भी नहीं..

    उत्तर देंहटाएं
  10. भाव इतने स्पष्ट हैं कि वे कल्पना के अनंत गर्भ में लीन हो गये हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. जरुर कबूल होंगी..सच्चे दिल से मांगी दुआएँ हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी सारी दुआएं क़बूल हों। भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है!
    पक्षियों का प्रवास-१

    उत्तर देंहटाएं
  13. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  14. एक दुआ है
    कि कम से कम
    एक दुआ तो
    हो जाए कबूल
    उसकी चौखट पर

    बहुत खूब!

    उत्तर देंहटाएं
  15. एक क्या आपकी हर दुआ कबूल हो ! आमीन !

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत खूब , बड़ी सरलता से बयान किया है , बह से गए हैं ...
    अपनी छोटी छोटी हसरतों से गिला भी तो नहीं
    मगर वो सुनता ही नहीं , जिसकी चौखट पे सुनवाई का यकीं है ..

    उत्तर देंहटाएं
  17. सच्चे दिल से मांगी दुआएँ हैं. कबूल तो होनी ही हैं

    उत्तर देंहटाएं
  18. aapki sari duaye bahut achchhi hai ,meri bhi yahi dua hai ki aapki sabhi duayen kubool hoo....

    उत्तर देंहटाएं
  19. vaah is duva ke liye bhi aik duva kee kabool ho jaye aapki duva.....bahut hee sundar rachna hai aapki....

    dhanyvaad vatvriksh me meri kavita khud se khud kee baten mei apnee tippani dene ke liye..

    उत्तर देंहटाएं
  20. एक दुआ है
    कि कम से कम
    एक दुआ तो
    हो जाए कबूल
    उसकी चौखट पर ...
    आमीन ... सच है अगर एक दुआ भी कबूल हो जाए तो जीवन सफल है ...

    उत्तर देंहटाएं