शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

तुम्हारी चौखट पर


तुम्हारी चौखट पर
कुछ अटक गया है मेरा
देखना
मिल जाए तो
रख देना घर के भीतर
ताख पर
जहाँ रखी हैं
तुम्हारी चूड़ियाँ


तुम्हारे ओसारे पर
कुछ रह गया है मेरा
देखना
मिल जाए तो
रख लेना
अपने सिरहाने
जहाँ रखा है
तुम्हारा अकेलापन


तुम्हारे आँगन में
कुछ छूट गया है मेरा
देखना
मिल जाए तो संभाल लेना
अपने आँचल में
जहाँ बसा है
किसी का मौन

17 टिप्‍पणियां:

  1. मिल जाए तो संभाल लेना
    अपने आँचल में
    जहाँ बसा है
    किसी का मौन
    बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है बारीक मनोभावो को.

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  2. कितने सुन्दर भावो को पिरोया है…………सीधे मन मे उतर गये………………कुछ भी कहने मे खुद को असमर्थ पा रही हूं……………भावो का सुन्दर समन्वय्।

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  3. अरुणजी, बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति और संवेदन के साथ अपने प्रस्तुति की है

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  4. रख लेना
    अपने सिरहाने
    जहाँ रखा है
    तुम्हारा अकेलापन bahut sunder abhivyakti hai sunder upamano ke sath.......

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  5. 7.5/10

    बेहतरीन पोस्ट
    जनाब आप की एक और रचना का जादू देख रहा हूँ.
    कविता क्या मानो भावनाओं का कोलाज दिखता है.
    जीते रहिये बरखुदार .... शुभानअल्लाह

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  6. बेहद संवेदनशील रचना। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    पक्षियों का प्रवास-१

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  7. अरून बाबू!! अपनी बात कहने लायक छोड़ा नहीं आपने.. एक लम्बी नज़्म लिखकर फाड़ चुका हूँ इस विषय पर कई साल पहले.. आज बस गुरुदेव की पंक्तियाँः
    .
    एक दफा वो याद है तुमको
    बिन बत्ती
    जब साइकिल का चालान हुआ था
    हमने कैसे
    भूखे, प्यासे, बेचारों सी ऐक्टिंग की थी
    हवलदार ने उल्टा
    एक अठन्नी देकर भेज दिया था.
    .
    एक चवन्नी मेरी थी, वो भिजवा दो!!

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  8. अरुण जी !!बहुत सुन्दर रचना आपकी .. वटवृक्ष में मेरी कविता " खुद से खुद की बातें " आपने पसंद कीं और टिपण्णी की - धन्यवाद

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  9. तुम्हारे ओसारे पर
    कुछ रह गया है मेरा
    देखना
    मिल जाए तो
    रख लेना
    अपने सिरहाने
    जहाँ रखा है
    तुम्हारा अकेलापन
    kai khyaalon mein atak jate hain mere khyaal, gaur karna ... mile to rakh dena pannon ke bich

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  10. umda rachna hai,

    reminded me the legendary song "mera kuch saman tumhare pass pada hai "

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  11. क्या कहूँ !!!! बस इतना ही कहूँगी की मन के भाव को उजागर करती पोस्ट. बहुत सुन्दर खूबसूरती से उकेरे हैं ये प्यार के रंग

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  12. ग़ज़ब की सब की सब ... भावनाओं की बरसात हो रही हो जैसे ... नाज़ुक एहसास लिए ...

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