रविवार, 18 जुलाई 2010

छत

भाई साहब
छत से आदमी और
उसके हैसियत का
चलता है पता

कई छतों पर
पडी होती हैं
टूटी कुर्सियां
मेज और
आलमारी किताबों वाली
इस से समझिये कि
आधुनिक है वो घर
किताबों के लिए
कोई स्थान नहीं वहां

कई छतों पर
मिल जायेगे आपको
पुराने टायर
साईकिल, स्कूटर और कार के
वह बड़ी हैसियत वाला घर है
वहां हैं मौजूद
जीवन के सभी आधुनिक साधन

कई छतों पर
देखा है मैंने स्वयं भी
छोटे छोटे बच्चों के साइकिल
समझ गया कि
बच्चे हो रहे हैं जवा
इस घर में
विस्थापित होने वाले हैं
मूल्य जल्दी ही

इन सब से परे
कुछ छतों पर आपको मिलेंगे
गमले
मौसमी और बारहमासी
फूलों और पत्तों से भरे
और ये बताता है कि
खूबसूरत होते हैं ये घर
और इनमे रहें वाले

इसके उलट
कुछ छतों पर
पा जायेंगे आप
गमलो में तरह तरह के कैक्टस
देशी विदेशी कैक्टस
संवेदना शुन्य होने का
देते हैं सबूत

कुछ छतों पर
मिलेंगे आपको
हजारों छेद वाली
फटी बनियान
किसी मेहनत कश की ,
बहुत प्रेरणा देते हैं
ये छत

भाई साहब
और इन सबके बीच
कुछ छत ऐसे भी हैं
जिनपर सजे होते हैं
चाँद, सितारे
ताने हुए आसमान के वितान पर
बिना किसी दीवार या खम्भे के सहारे
सच कहता हूँ
ऐसे छतों के नीचे
नींद बहुत अच्छी आती है

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब अरुणजी .जिस की सर पर वितान ही छत हो -उसके सपने भी असाधारण होते हैं उन सपनों को भला कौन पढ़ पाया है.

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  2. इन सबके बीच
    कुछ छत ऐसे भी हैं
    जिनपर सजे होते हैं
    चाँद, सितारे
    ताने हुए आसमान के वितान पर
    बिना किसी दीवार या खम्भे के सहारे
    सच कहता हूँ
    ऐसे छतों के नीचे
    नींद बहुत अच्छी आती है
    ... aur sapne bhi

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  3. मुझै तो आप एक बात बतायें कि इतनी खूबसूरत कवितायें आप इस गति से कैसे कह लेते हैं। एक पूरा इंद्रधनुष पैदा कर दिया आपने छत का।

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  4. chhat par itna kuchh bahut khoob meri chhat par bhi bas aasmaan hai ki kalpna ki udaan mein badha naa pahunche

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  5. आपकी इस कविता की व्यंजना जबर्दस्त है ।

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  6. कल्पना को यह आयाम पहली बार निहारा है। बहुत अच्छा लगा।

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  7. brilliant ! brilliant brilliant !

    hats off to your unique thought process and editing and presentation skills...

    you always choose an simple uncomplicated topic and creates magic with words and which takes our imagination to another level where every thing looks so real and in reach as the topics are common to every one and one can relate to it !

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  8. कुछ छत ऐसे भी हैं
    जिनपर सजे होते हैं
    चाँद, सितारे
    ताने हुए आसमान के वितान पर
    बिना किसी दीवार या खम्भे के सहारे
    सच कहता हूँ
    ऐसे छतों के नीचे
    नींद बहुत अच्छी आती है
    kya kehoon......shbd nahi..!!

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  9. मंगलवार २० जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  10. इस से समझिये कि
    आधुनिक है वो घर
    किताबों के लिए
    कोई स्थान नहीं वहां

    आपकी यह रचना बहुत कुछ कह गयी....सुन्दर ..अतिसुन्दर अभिव्यक्ति ..

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  11. सही समय पर और प्रेरक पोस्ट के लिये आभार

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  12. लाजवाब सुन्दर अभिव्यक्ति. छत के कितने पर्याय पर न जाने अपनी किस्मत में कौन सा था

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  13. वाह....क्या खूब कविता है ..भाव और शिल्प दोनों ही स्तरों पर प्रभावी...बधाई..

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  14. वाह क्या बात है...छत पर भी ज्योतिष दिखा दिया...अब तो हमें अपनी छत के बारे में सोचना पड़ेगा.

    बहुत अच्छी रचना.

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  15. वाह अरुण जी वाह...बेहतरीन रचना है आपकी...छतों का विश्लेषण कमाल का किया है...सच्ची और अच्छी रचना...
    नीरज

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  16. आपके धारदार लेखन पर बहुत प्रेरणा मिलती है हम भी समय के अनुसार लिखते रहें. लगातार. ताकि संवेदनाएं बनी रही. संवेदना शून्य भी मानव कैसा नहीं?

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  17. बहुत अच्छा....मेरा ब्लागः"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com .........साथ ही मेरी कविता "हिन्दी साहित्य मंच" पर भी.......आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे...धन्यवाद

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