मंगलवार, 6 जुलाई 2010

बादल और तुम्हारी हंसी

तुम्हारी हंसी
वैसी ही लगती है
जैसे
बरसता हुआ बादल
ए़क अनोखे
सुर और ताल में

तुम्हारी हंसी
वैसे ही खिलती है
तुम्हारे अधरों पर
जैसे
वारीश के बाद
बूंदे टिकी होती हैं
पत्तों पर

तुम्हारी हंसी का रंग
वैसा ही है
जैसे
भरी बारिश के बाद
गीले गीले पत्तों का
हरा रंग.

तुम्हारी हंसी
पैदा करती है
ए़क इन्द्रधनुष
मन के भीतर
जैसे आसमान में बनता है
यह बारिश के बाद

तुम्हारी हंसी
जिंदगी है मेरी
जैसे
हैं बादल
हमारे लिए
तुम्हारे लिए
खेतों के लिए
नदी के लिए

17 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय की हंसी के ऐसे वर्णन ने बारिश कर दी है यहाँ ताप शीतल हों गया और मन में जाने कितने इन्द्रधनुष भर गए .बधाई ऐसी हसींन बारिश के लिए .

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  2. बस यह हंसीं बनी रहे....प्रकृति भी मेहरबान रहेगी...बहुत सुन्दर रचना..

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  3. aapke kavita ki pyari hansi, hamare chehre pe muskaan de gayee..........god bless!!

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  4. हंसी को बहुत ही खूबसूरती से परिभाषित किया है…………………बडी बारीकी से अध्ययन किया है।

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  5. तुम्हारी हंसी
    पैदा करती है
    ए़क इन्द्रधनुष
    मन के भीतर
    जैसे आसमान में बनता है
    यह बारिश के बाद

    smiling is important , and its great feature that once you bring the smile on some bodies face your heart and soul smiles at the same time...

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  6. तुम्हारी हंसी
    वैसे ही खिलती है
    तुम्हारे अधरों पर
    जैसे
    वारीश के बाद
    बूंदे टिकी होती हैं
    पत्तों पर

    वाह....बहुत सुंदर......!!

    आपकी ही कविता '' हम सब साथ साथ ' पत्रिका में मेरे साथ छपी है न ....?

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  7. हमारे लिए
    तुम्हारे लिए
    खेतों के लिए
    नदी के लिए.....sumadhur barish hui shabdon ki, bhavon ki..

    ye likhne ka aabhar

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  8. तुम्हारी हंसी
    पैदा करती है
    ए़क इन्द्रधनुष
    मन के भीतर
    जैसे आसमान में बनता है
    यह बारिश के बाद
    hansi to vahi hai jo man me indradhanush bana de,bahut khoob....

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  9. तुम्हारी हंसी
    पैदा करती है
    ए़क इन्द्रधनुष
    मन के भीतर ..

    उनकी हँसी के बिना सब कुछ सूना है ... बारिश की बूँदें भी तो तभी अच्छी लगती हैं जब उनकी हँसी साथ हो ...
    दिलकश रचना है ...

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  10. क्या हसीन है ये हंसी!!!!!गीली हंसी,पीली हंसी,होंठों पे सी ली हंसी बारिश ले आये ये हंसी.

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  11. arun ji,
    aisi pyaari hasi par sab kurbaan...

    तुम्हारी हंसी
    पैदा करती है
    ए़क इन्द्रधनुष
    मन के भीतर
    जैसे आसमान में बनता है
    यह बारिश के बाद

    bahut komal bhaaw, sundar rachna, badhai sweekaaren.

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  12. "तुम्हारी हंसी का रंग
    वैसा ही है
    जैसे
    भरी बारिश के बाद
    गीले गीले पत्तों का"
    aise to hansi ka aik apna hi rang hota hai,lekin hara rang dalkar aapne use apna bana liya.behad sunder abhivyakti,atyant khubsoorat .

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