बुधवार, 2 जून 2010

वर्तमान

इतिहास
केवल दिग्भ्रमित
है करता
और
भविष्य
है भरमाता
तभी
मैं
केवल वर्तमान में
जीता हूँ
हर पल
हर क्षण

तुम्हारे आँचल में सजे
सितारों के संग
और चूड़ियों में गुंथे
जुगनूओं से
कल ली है
मित्रता

तुम से सुन्दर
क्या हो सकता है
वर्तमान !

11 टिप्‍पणियां:

  1. Vartmaaan me jeeta hua aapko dekhna achchha laga.......:)

    ek pathniya rachna....
    hamare blog pe aayen.......:P

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  2. बहुत सही!!

    तुम से सुन्दर
    क्या हो सकता है
    वर्तमान


    -सुन्दर कोमल अभिव्यक्ति!

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  3. आंचल, सितारे, चूड़ियों, जुगनुओं का मज़ा तुम लेते रहे तो नौकरी कौन करेगा !!!!!!!!.अब ये दिन भी देखने पड़ेंगे

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  4. अति सुन्दर ,,वर्तमान हर रूप में सुन्दर ही होता है !

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  5. बहुत सुंदर जज्बातों को हृदय से उड़ेलती हुयी अभिव्यक्ति

    अच्छा लगा आपके ब्लाग पर आकर

    आभार अरुण जी

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  6. तुम्हारे आँचल में सजे
    सितारों के संग
    और चूड़ियों में गुंथे
    जुगनूओं से
    कल ली है
    मित्रता

    सुन्दर कोमल अभिव्यक्ति!

    उत्तर देंहटाएं
  7. 'Vartman' aur 'tum'ko samanantar khara karne ki prasangikta kya hai jabki 'Tum'hi ho'Vartaman'.Aisa pratit hota hai mano kisi lambi kavita ki arambhik char panktiya ho.Aasha hai alochana ko chunauti ke rup me lenge.

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