मंगलवार, 1 जून 2010

तुम्हारे बिना

आज
अचानक लगा
फूलों की पंखुरियों से
गायब हो रहे हैं
रंग
और
बारिस में नहाई
पत्तियों का हरापन
धुल रहा है
तेजी से

आसमान में
लगा
चल रही है
तेज आंधी
और
दूर जा रहा है
उसका नीलापन

तुम्हारे
ना होने के
एहसास भर से
बदल जाता है
रंग
मन का
प्रकृति का

8 टिप्‍पणियां:

  1. तो सोचो ... कैसे रहेंगे तुम्हारे बिना !
    है ना ?

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  2. तुम्हारे
    ना होने के
    एहसास भर से
    बदल जाता है
    रंग
    मन का
    प्रकृति का
    तुम म म ....बिन जाऊं कहाँ की दुनिया में ....वाह जी वाह

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  3. दिल के सुंदर एहसास
    ...सच्ची भावाभिव्यक्ति

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  4. Arun ji
    तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

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  5. आसमान में
    लगा
    चल रही है
    तेज आंधी
    और
    दूर जा रहा है
    उसका नीलापन

    ji bahut hi behtareen rachna hai, mann moh liya aur ek geet yaad aa gaya...

    "TUM BIN JIYA JAYE KAISE , KAISE JIYA JAYE TUM BIN, SADIYON SE LAMBI HAI RATTEIN , SADIYON SE LAMBE HUE DIN "

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