गुरुवार, 10 जून 2010

जूता

जूता
पैरों में होता है
सभी जानते हैं
कोई नयी बात नहीं
लेकिन
जूता
पैरो की ठोकरों में
रहता है
सदैव
झेलता हुआ
तिरस्कार
अवहेलना

हां
मैं कर रहा हूं
जूते की बात
जो
पैरों में नहीं
हमारे बीच रहता है

7 टिप्‍पणियां:

  1. इस पोस्ट के लिेए साधुवाद

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  2. सदैव
    झेलता हुआ
    तिरस्कार
    अवहेलना
    Gahre Vichaar Hain,

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  3. हम्म ..विचारणीय ...पैरों में ही रहे जूता तभी तक ठीक है

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