गुरुवार, 3 जून 2010

ईश्वर, तुम और द्वन्द


तुम
आस्था हो
आस्था से ही
है ईश्वर

तुम
हो ईश्वर


तुम
प्रेम हो

प्रेम से ही
है ईश्वर

तुम
हो ईश्वर


तुम
आनंद हो
आनंद से ही
है ईश्वर

तुम
हो ईश्वर


तुम
मोक्ष हो
मोक्ष ही
है ईश्वर

तुम
हो ईश्वर


तुम
आदर्श हो
आदर्श ही
है ईश्वर

तुम
हो ईश्वर


तुम
माया हो
माया
ईश्वर नहीं

तुम
नहीं हो
ईश्वर

द्वन्द हो
तुम

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह....बहुत सुन्दर विवेचन ....

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  2. द्वन्द की परिणति निर्द्वंद है
    इसलिये तुम हो ईश्वर

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  3. खूबसूरत भाव दर्शाती बढ़िया कविता..

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  4. तुम
    माया हो
    माया
    ईश्वर नहीं

    तुम
    नहीं हो
    ईश्वर

    द्वन्द हो
    तुम

    umda rachna hai.... unique thought process and great presentation..

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  5. Kavita bahut sundar dhang se tan kar khari hoti hai.Kintu yadi yaun vimb prayog karen to uska 'shighrapatan' ho jata hai.Mere vichar me yadi shirshak sirf DWAND hi rahe to paryapt hai.Vastutah hamare jivan me vyapt antardwandon aur viradhabhashon ka vishay itna samichin hai ki in ko jitna samajhane ki koshish ki jaye utna hi achha.

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