शुक्रवार, 4 जून 2010

तुम और धर्म



धारण करने योग्य
जो भी है
जरुरी नहीं है
हो वह
धर्म ही

तुम्हे जो
धारण किया है
मैंने
अपने रोम रोम में
अपनी हर सांस में
हर क्षण
हर पल
तुमसे निर्देशित हुआ हूँ
निर्धारित हुआ हूँ
पोषित हुआ हूँ
मैं ,
धर्म नहीं हो
तुम
कुछ अधिक हो

ब्रहमांड हो
परमानन्द हो
व्योम हो
क्षितिज हो
निराकार हो
निर्द्वंद हो
चिरंतन हो
सनातन हो

धर्म से
कुछ अधिक हो
तुम

11 टिप्‍पणियां:

  1. धर्म नहीं हो
    तुम
    कुछ अधिक हो
    धर्म से अधिक होना और परमानन्द अनुभूत करना
    सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  2. ब्रहमांड हो
    परमानन्द हो
    व्योम हो
    क्षितिज हो
    निराकार हो
    निर्द्वंद हो
    चिरंतन हो
    सनातन हो
    gr8

    उत्तर देंहटाएं
  3. धर्म नहीं हो
    तुम
    कुछ अधिक हो
    ब्रहमांड हो
    परमानन्द हो
    व्योम हो
    क्षितिज हो
    निराकार हो
    निर्द्वंद हो
    चिरंतन हो
    सनातन हो
    बेमिशाल

    उत्तर देंहटाएं
  4. धर्म से
    कुछ अधिक हो
    तुम
    arun jee ,
    namaskar!
    tumne mujhe oodh liya , socha maine shayad prura brahmand simt gaya ho mujhe main , isi prakar ki abhivyakti , sunder ,
    sadhuwad

    उत्तर देंहटाएं
  5. धर्म नहीं हो
    तुम
    कुछ अधिक हो

    100 % satya hai......

    उत्तर देंहटाएं
  6. ब्रहमांड हो
    परमानन्द हो
    व्योम हो
    क्षितिज हो
    निराकार हो
    निर्द्वंद हो
    चिरंतन हो
    सनातन हो

    धर्म से
    कुछ अधिक हो
    तुम
    Oh ! Kya gazab alfaaz hain!

    उत्तर देंहटाएं
  7. धर्म से
    कुछ अधिक हो
    तुम

    -क्या बात है, बहुत बढ़िया!

    उत्तर देंहटाएं
  8. dharm se kuchh adhik ho tum,jo rah dikhati ho bhatakne se bachati ho, ब्रहमांड हो
    परमानन्द हो
    व्योम हो
    क्षितिज हो
    निराकार हो
    निर्द्वंद हो
    चिरंतन हो
    सनातन हो
    aur jo bhi kuchh ho shayd nirakar dharm ka sakar roop ho tum jo dharm ke sath swam ko bhi liye hai,isliye dharm se kuchh adhik ho tum.bahut sunder abhivyakti hai arunji.par kuchh ankahe ko kahne ka sahas kar rahi hu.
    aasha hai aap anyatha na lenge.

    उत्तर देंहटाएं
  9. ब्रहमांड हो
    परमानन्द हो
    व्योम हो
    क्षितिज हो
    निराकार हो
    निर्द्वंद हो
    चिरंतन हो
    सनातन हो
    अरुण इस बार तो बहुत व्यापक क्षेत्र में कदम रख दिया है ब्रह्माण्ड, क्षितिज,व्योम सभी कुछ है पर इसमें तो हम भी आ गए जरा साफ़ साफ़ कहो किस के लिया है ये सब इतना विस्तार

    उत्तर देंहटाएं
  10. धर्म .ईश्वर ,बाज़ार ..........खूबसूरत भाव .सुन्दर अलफ़ाज़ .

    उत्तर देंहटाएं